हिंदी व्याकरण (Hindi Grammar) में जो शब्द संज्ञा (Noun) या सर्वनाम (Pronoun) की विशेषता बताते हैं, उन्हें विशेषण (Adjective) कहते हैं। जैसे— 'काला' घोड़ा, 'मीठा' सेब। लेकिन विशेषता सिर्फ रंग या स्वाद की नहीं होती, यह संख्या या मात्रा (वजन) की भी हो सकती है। इसलिए विशेषण को मुख्य रूप से 4 प्रकारों में बांटा गया है।
छात्र अक्सर 'संख्यावाचक' और 'परिमाणवाचक' में गलती करते हैं। याद रखने की ट्रिक: जिन चीजों को आप 1, 2, 3 गिन सकते हैं (जैसे केले, पेन) वे 'संख्यावाचक' हैं। जिन्हें गिन नहीं सकते, सिर्फ तौल सकते हैं (जैसे पानी, चीनी, तेल) वे 'परिमाणवाचक' हैं!
हिंदी व्याकरण के अनुसार विशेषण के 4 मुख्य भेद (प्रकार) होते हैं:
जो शब्द किसी वस्तु या व्यक्ति के गुण, दोष, रंग, आकार, स्वभाव या अवस्था (Condition) का बोध कराते हैं।
जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की 'संख्या' (Number/गिनती) बताते हैं। इन्हें हम उंगलियों पर गिन सकते हैं।
'परिमाण' का अर्थ होता है 'मात्रा' या 'वजन' (Quantity)। जो चीजें हम गिन नहीं सकते, बल्कि तौलते या मापते (Measure) हैं, उनके विशेषण परिमाणवाचक होते हैं।
जब कोई 'सर्वनाम' शब्द (जैसे- यह, वह, कोई, कौन) किसी संज्ञा से ठीक पहले आकर उसकी विशेषता या उसकी ओर इशारा (Point out) करने का काम करे, तो वह सार्वनामिक विशेषण कहलाता है।
जो शब्द 'विशेषण' की भी विशेषता बताते हैं, उन्हें प्रविशेषण कहते हैं। जैसे- "राम **बहुत** तेज़ दौड़ता है।" यहाँ 'तेज़' विशेषण है, लेकिन 'बहुत' शब्द उस तेज़ की भी विशेषता बता रहा है, अतः यह प्रविशेषण है।
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