अनेक शब्दों के लिए एक शब्द का प्रयोग भाषा को संक्षिप्त और प्रभावशाली बनाता है। जैसे 'जो पढ़ा-लिखा न हो' के लिए 'अनपढ़' और 'जो दिखाई न दे' के लिए 'अदृश्य' जैसे एकल शब्द प्रयोग किए जाते हैं। यह हिंदी व्याकरण का महत्वपूर्ण भाग है जो परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है।
'जो पढ़ा-लिखा न हो' के लिए एक शब्द है: अनपढ़ या निरक्षर।
'जो दिखाई न दे' के लिए एक शब्द है: अदृश्य।
'जो मरे नहीं' या 'जिसे मृत्यु न आए' के लिए एक शब्द है: अमर।
'जो उपकार माने' के लिए एक शब्द है: कृतज्ञ।
'जो उपकार न माने' के लिए एक शब्द है: कृतघ्न।
'जहाँ पुस्तकें रखी जाती हों' के लिए एक शब्द है: पुस्तकालय।
'जिसके माता-पिता न हों' के लिए एक शब्द है: अनाथ।
'जो सब जानता हो' के लिए एक शब्द है: सर्वज्ञ।
जब किसी वाक्यांश या अनेक शब्दों के समूह को एक ही शब्द में व्यक्त किया जाए, उसे 'अनेक शब्दों के लिए एक शब्द' कहते हैं। इससे भाषा में संक्षिप्तता और स्पष्टता आती है।
जो पढ़ा-लिखा न हो = अनपढ़/निरक्षर जो दिखाई न दे = अदृश्य जो मरे नहीं = अमर जो जानने योग्य हो = ज्ञातव्य जो कहा न जा सके = अकथनीय जो सोचा न जा सके = अचिंतनीय जो देखा न जा सके = अदृश्य जो सुना न जा सके = अश्रव्य जो किया न जा सके = असंभव जो विश्वास योग्य न हो = अविश्वसनीय
जहाँ पुस्तकें रखी जाती हैं = पुस्तकालय जहाँ औषधियाँ मिलती हैं = औषधालय/चिकित्सालय जहाँ अनाथ रहते हैं = अनाथालय जहाँ शव रखे जाते हैं = शवगृह/मुर्दाघर जहाँ पशु रखे जाते हैं = पशुशाला जहाँ नाटक खेले जाते हैं = रंगशाला/नाट्यशाला
जो पहले हो चुका हो = भूत/अतीत जो अभी हो रहा हो = वर्तमान जो आगे होगा = भविष्य जो हर वर्ष हो = वार्षिक जो हर माह हो = मासिक जो हर सप्ताह हो = साप्ताहिक जो हर दिन हो = दैनिक
जो उपकार को माने = कृतज्ञ जो उपकार न माने = कृतघ्न जो बहुत बोलता हो = वाचाल जो कम बोलता हो = मितभाषी जो दूसरों की भलाई चाहे = परोपकारी जिसकी पत्नी मर गई हो = विधुर जिसका पति मर गया हो = विधवा जिसके माता-पिता न हों = अनाथ जो सब जानता हो = सर्वज्ञ जो सब कर सकता हो = सर्वशक्तिमान
'जो पढ़ा-लिखा न हो' के लिए एक शब्द है: अनपढ़ या निरक्षर। इसे साक्षरता के विपरीत अर्थ में प्रयुक्त किया जाता है।
'जो दिखाई न दे' के लिए एक शब्द है: अदृश्य। इस शब्द में 'अ' (नहीं) + 'दृश्य' (जो दिखे) होता है।
कृतज्ञ उसे कहते हैं जो दूसरों के उपकार को मानता है और कृतज्ञता प्रकट करता है। कृतघ्न उसे कहते हैं जो उपकार को नहीं मानता और एहसान फरामोश होता है।
'जो सर्वत्र व्याप्त हो' के लिए एक शब्द है: सर्वव्यापी। इसका उपयोग परमात्मा के लिए भी किया जाता है।
अनेक शब्दों के लिए एक शब्द का प्रयोग भाषा को संक्षिप्त, स्पष्ट और प्रभावशाली बनाने के लिए किया जाता है। लंबे वाक्यांश की जगह एक शब्द का प्रयोग अभिव्यक्ति को सुविधाजनक बनाता है।
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