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अविकारी शब्द (अव्यय) – परिभाषा, भेद और उदाहरण

अविकारी शब्द वे शब्द होते हैं जिनके रूप में लिंग, वचन, कारक, काल आदि के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता — ये हर स्थिति में एक समान (अपरिवर्तित) रहते हैं। इन्हें 'अव्यय' भी कहा जाता है। हिंदी व्याकरण में शब्दों को रूप-परिवर्तन के आधार पर दो भागों में बाँटा जाता है — विकारी शब्द (जिनका रूप बदलता है) और अविकारी शब्द या अव्यय (जिनका रूप नहीं बदलता)। अविकारी शब्दों के चार भेद होते हैं — क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक।

Question (Click to Flip)

अविकारी शब्द किसे कहते हैं?

Answer

जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, कारक या काल के अनुसार कोई परिवर्तन (विकार) नहीं होता, उन्हें अविकारी शब्द या अव्यय कहते हैं। ये शब्द हर वाक्य में एक समान रहते हैं, जैसे – यहाँ, वहाँ, और, परन्तु, अरे, वाह।

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Key Facts

अविकारी शब्द (अव्यय) वे शब्द हैं जिनका रूप कभी नहीं बदलता।

इन पर लिंग, वचन, कारक, काल का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

अविकारी शब्द को 'अव्यय' भी कहते हैं।

अव्यय के चार भेद हैं: क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक।

विकारी शब्द के चार भेद: संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया।

उदाहरण: यहाँ, वहाँ, और, परन्तु, अरे, वाह, ऊपर, नीचे।

क्रियाविशेषण क्रिया की विशेषता बताता है, जैसे – धीरे, तेज़।

अविकारी शब्द की परिभाषा

जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, कारक या काल के अनुसार कोई विकार (परिवर्तन) नहीं होता, उन्हें अविकारी शब्द या अव्यय कहते हैं।

जैसे – यहाँ, वहाँ, धीरे, और, तथा, परन्तु, अरे, वाह, ऊपर, नीचे आदि। ये शब्द वाक्य में चाहे जहाँ प्रयोग हों, इनका रूप वही बना रहता है।

उदाहरण: • राम धीरे चलता है। • सीता धीरे चलती है। • बच्चे धीरे चलते हैं।

यहाँ संज्ञा और क्रिया के रूप बदले, परन्तु 'धीरे' शब्द का रूप नहीं बदला — इसलिए 'धीरे' अविकारी शब्द (अव्यय) है।

विकारी और अविकारी शब्द में अंतर

विकारी शब्द: • इनका रूप लिंग, वचन, कारक, काल के अनुसार बदलता है। • चार प्रकार होते हैं – संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया। • उदाहरण: लड़का → लड़की → लड़के; खाता है → खाती है → खाते हैं।

अविकारी शब्द (अव्यय): • इनका रूप कभी नहीं बदलता। • चार प्रकार होते हैं – क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक। • उदाहरण: जब, तब, यहाँ, और, किन्तु, अहा – ये हर वाक्य में एक समान रहते हैं।

अविकारी शब्द (अव्यय) के भेद

अव्यय के चार मुख्य भेद हैं:

  1. क्रियाविशेषण अव्यय: जो शब्द क्रिया की विशेषता बताते हैं। उदाहरण: धीरे-धीरे, तेज़, यहाँ, वहाँ, अभी, कल, प्रतिदिन। जैसे – वह तेज़ दौड़ता है। (तेज़ – क्रिया 'दौड़ता है' की विशेषता)

  2. संबंधबोधक अव्यय: जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम का संबंध वाक्य के दूसरे शब्दों से जोड़ते हैं। उदाहरण: ऊपर, नीचे, पास, बिना, सहित, ओर, के लिए। जैसे – मेज़ के ऊपर पुस्तक है। (के ऊपर – संबंधबोधक)

  3. समुच्चयबोधक अव्यय: जो शब्द दो शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को आपस में जोड़ते हैं। उदाहरण: और, तथा, एवं, या, अथवा, किन्तु, परन्तु, लेकिन, क्योंकि। जैसे – राम और श्याम मित्र हैं। (और – समुच्चयबोधक)

  4. विस्मयादिबोधक अव्यय: जो शब्द हर्ष, शोक, आश्चर्य आदि भाव प्रकट करते हैं। उदाहरण: अरे!, वाह!, अहा!, ओह!, हाय!, छिः! जैसे – वाह! कितना सुन्दर दृश्य है। (वाह – विस्मयादिबोधक)

Questions and Answers

अविकारी शब्द किसे कहते हैं?+

जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, कारक या काल के अनुसार कोई परिवर्तन (विकार) नहीं होता, उन्हें अविकारी शब्द या अव्यय कहते हैं। ये शब्द हर वाक्य में एक समान रहते हैं, जैसे – यहाँ, वहाँ, और, परन्तु, अरे, वाह।

अविकारी शब्द को और किस नाम से जाना जाता है?+

अविकारी शब्द को 'अव्यय' भी कहा जाता है, क्योंकि इनमें कोई 'व्यय' अर्थात परिवर्तन नहीं होता। ये शब्द लिंग, वचन, कारक और काल के अनुसार अपना रूप नहीं बदलते।

अविकारी शब्द (अव्यय) के कितने भेद होते हैं?+

अविकारी शब्द (अव्यय) के चार भेद होते हैं – (1) क्रियाविशेषण अव्यय, (2) संबंधबोधक अव्यय, (3) समुच्चयबोधक अव्यय, और (4) विस्मयादिबोधक अव्यय।

विकारी और अविकारी शब्द में क्या अंतर है?+

विकारी शब्दों का रूप लिंग, वचन, कारक और काल के अनुसार बदलता है (जैसे संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया)। अविकारी शब्दों (अव्यय) का रूप कभी नहीं बदलता (जैसे यहाँ, और, परन्तु, वाह)। यही दोनों में मुख्य अंतर है।

समुच्चयबोधक और संबंधबोधक अव्यय में क्या अंतर है?+

समुच्चयबोधक अव्यय दो शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को आपस में जोड़ते हैं, जैसे – और, तथा, परन्तु, क्योंकि। संबंधबोधक अव्यय संज्ञा या सर्वनाम का संबंध वाक्य के अन्य शब्दों से जोड़ते हैं, जैसे – ऊपर, नीचे, पास, बिना।

अविकारी शब्द के कुछ उदाहरण दीजिए।+

अविकारी शब्द के उदाहरण – यहाँ, वहाँ, अभी, कल, धीरे, तेज़ (क्रियाविशेषण); ऊपर, नीचे, पास, बिना (संबंधबोधक); और, तथा, परन्तु, क्योंकि (समुच्चयबोधक); अरे, वाह, अहा, ओह (विस्मयादिबोधक)।

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