Study Guides/Sanskrit/Sev Dhatu Roop in Sanskrit (सेव् धातु रूप)
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सेव् धातु रूप संस्कृत – सभी लकार (Sev Dhatu Roop)

सेव् संस्कृत की एक प्रमुख धातु है, जिसका अर्थ है 'सेवा करना' या 'सेवन करना'। यह भ्वादिगण (प्रथम गण) की आत्मनेपद धातु है। आत्मनेपद होने के कारण इसके रूप परस्मैपद धातुओं से भिन्न होते हैं। सेव् धातु का लट् लकार प्रथम पुरुष एकवचन रूप 'सेवते' है। इस लेख में सेव् धातु के रूप प्रमुख लकारों – लट्, लृट्, लङ्, लोट् और विधिलिङ् – में दिए गए हैं।

Question (Click to Flip)

सेव् धातु का लट् लकार प्रथम पुरुष एकवचन रूप क्या है?

Answer

सेव् धातु का लट् लकार (वर्तमान काल) प्रथम पुरुष एकवचन रूप 'सेवते' है, जिसका अर्थ है 'वह सेवा करता है'।

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Key Facts

सेव् धातु का अर्थ है 'सेवा करना' या 'सेवन करना'।

यह भ्वादिगण (प्रथम गण) की आत्मनेपद धातु है।

लट् लकार प्रथम पुरुष एकवचन: सेवते।

लृट् लकार (भविष्य): सेविष्यते।

लङ् लकार (भूत): असेवत।

लोट् लकार (आज्ञा): सेवताम्; मध्यम पुरुष: सेवस्व।

विधिलिङ् लकार: सेवेत।

सेव् धातु – लट् लकार (वर्तमान काल)

पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन

प्रथम पुरुष: सेवते | सेवेते | सेवन्ते मध्यम पुरुष: सेवसे | सेवेथे | सेवध्वे उत्तम पुरुष: सेवे | सेवावहे | सेवामहे

अर्थ: सेवते = वह सेवा करता है। सेवन्ते = वे सेवा करते हैं।

सेव् धातु – लृट् और लङ् लकार

लृट् लकार (भविष्य काल – सेवा करेगा): प्रथम पुरुष: सेविष्यते | सेविष्येते | सेविष्यन्ते मध्यम पुरुष: सेविष्यसे | सेविष्येथे | सेविष्यध्वे उत्तम पुरुष: सेविष्ये | सेविष्यावहे | सेविष्यामहे

लङ् लकार (भूत काल – सेवा की): प्रथम पुरुष: असेवत | असेवेताम् | असेवन्त मध्यम पुरुष: असेवथाः | असेवेथाम् | असेवध्वम् उत्तम पुरुष: असेवे | असेवावहि | असेवामहि

सेव् धातु – लोट् और विधिलिङ् लकार

लोट् लकार (आज्ञा – सेवा करो): प्रथम पुरुष: सेवताम् | सेवेताम् | सेवन्ताम् मध्यम पुरुष: सेवस्व | सेवेथाम् | सेवध्वम् उत्तम पुरुष: सेवै | सेवावहै | सेवामहै

विधिलिङ् लकार (चाहिए – सेवा करनी चाहिए): प्रथम पुरुष: सेवेत | सेवेयाताम् | सेवेरन् मध्यम पुरुष: सेवेथाः | सेवेयाथाम् | सेवेध्वम् उत्तम पुरुष: सेवेय | सेवेवहि | सेवेमहि

Questions and Answers

सेव् धातु का लट् लकार प्रथम पुरुष एकवचन रूप क्या है?+

सेव् धातु का लट् लकार (वर्तमान काल) प्रथम पुरुष एकवचन रूप 'सेवते' है, जिसका अर्थ है 'वह सेवा करता है'।

सेव् धातु किस गण और पद की धातु है?+

सेव् धातु भ्वादिगण (प्रथम गण) की आत्मनेपद धातु है। आत्मनेपद होने के कारण इसके रूप 'सेवते, सेवेते, सेवन्ते' इस प्रकार चलते हैं।

सेव् धातु का लङ् लकार (भूत काल) रूप क्या है?+

सेव् धातु का लङ् लकार (भूत काल) प्रथम पुरुष एकवचन में 'असेवत', द्विवचन में 'असेवेताम्' और बहुवचन में 'असेवन्त' होता है।

सेव् धातु का लोट् लकार (आज्ञा) में मध्यम पुरुष एकवचन रूप क्या है?+

सेव् धातु का लोट् लकार (आज्ञार्थ) मध्यम पुरुष एकवचन रूप 'सेवस्व' है, जिसका अर्थ है 'तू सेवा कर'।

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