संस्कृत व्याकरण के विशाल महासागर में, 'किम्' (Kim) एक अत्यधिक भारी और सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला सर्वनाम (Pronoun) है। किम् का भारी अर्थ है 'कौन' (Who) या 'क्या' (What)। संस्कृत में किसी भी प्रकार का भारी प्रश्न (Question) पूछने के लिए 'किम्' के भारी शब्द रूपों का ही प्रयोग किया जाता है। इसके रूप तीनों विशाल लिंगों (पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग) में अलग-अलग भारी तरह से चलते हैं।
सर्वनाम (Pronouns) शब्दों में कभी भी भारी 'संबोधन' (Vocative) विभक्ति नहीं होती है! (हम कभी नहीं कहते 'अरे कौन!') इसलिए टेबल हमेशा सप्तमी पर ही भारी रूप से खत्म हो जाती है।
यह भारी रूप आदमियों या लड़कों (कौन लड़का?) के लिए प्रयोग होता है:
| भारी विभक्ति | एकवचन (Singular) | द्विवचन (Dual) | बहुवचन (Plural) |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | कः (कौन) | कौ (कौन दो) | के (कौन सब) |
| द्वितीया | कम् (किसको) | कौ | कान् |
| तृतीया | केन (किससे) | काभ्याम् | कैः |
| चतुर्थी | कस्मै (किसके लिए) | काभ्याम् | केभ्यः |
| पञ्चमी | कस्मात् (किससे अलग) | काभ्याम् | केभ्यः |
| षष्ठी | कस्य (किसका) | कयोः | केषाम् |
| सप्तमी | कस्मिन् (किसमें) | कयोः | केषु |
यह भारी रूप महिलाओं या लड़कियों (कौन लड़की?) के लिए प्रयोग होता है:
| भारी विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | का | के | काः |
| द्वितीया | काम् | के | काः |
| तृतीया | कया | काभ्याम् | काभिः |
| चतुर्थी | कस्यै | काभ्याम् | काव्यः |
| पञ्चमी | कस्याः | काभ्याम् | काव्यः |
| षष्ठी | कस्याः | कयोः | कासाम् |
| सप्तमी | कस्याम् | कयोः | कासु |
यह भारी रूप निर्जीव वस्तुओं (क्या वस्तु?) के लिए प्रयोग होता है। भारी ट्रिक: इसकी केवल पहली दो भारी लाइनें पुल्लिंग से अलग होती हैं, बाकी नीचे का पूरा विशाल रूप बिल्कुल पुल्लिंग (कः) के भारी रूप के समान ही चलता है।
| भारी विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | किम् | के | कानि |
| द्वितीया | किम् | के | कानि |
| (तृतीया से लेकर सप्तमी तक सब कुछ पुल्लिंग 'कः' के भारी समान चलेगा) |
सप्तमी का भारी चिह्न 'में/पर' होता है। इसलिए भारी 'कस्मिन्' का विशाल अर्थ है: **'किसमें'** या **'किस पर'**। (जैसे: बालकः *कस्मिन्* विद्यालय पठति? - बालक *किस* विशाल स्कूल *में* पढ़ता है?)
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