लृट् लकार संस्कृत का भविष्यत् काल (Future Tense) है। जब कोई कार्य आने वाले समय में होगा, तो लृट् लकार का प्रयोग किया जाता है। इसमें धातु के साथ 'स्य' प्रत्यय जोड़कर रूप बनाया जाता है। लृट् लकार के संकेत शब्द हैं: श्वः (कल), परश्वः (परसों), अग्रे (आगे), भविष्ये (भविष्य में)।
लृट् लकार = भविष्यत् काल (Future Tense)
पहचान: 'गा/गी/गे' – जैसे 'पढ़ेगा'
प्रत्यय: धातु + स्य + ति/तः/न्ति आदि
संकेत शब्द: श्वः (कल), परश्वः (परसों), भविष्ये
भू → भविष्यति; पठ् → पठिष्यति; गम् → गमिष्यति
इ-आगम: अधिकांश धातुओं में 'इ' जोड़कर 'स्य' लगाते हैं
लिख् → लेखिष्यति (गुण होता है: इ→ए)
परस्मैपद और आत्मनेपद दोनों रूप होते हैं
लृट् लकार = भविष्यत् काल (Future Tense) प्रश्न: कार्य कब होगा? → आगे होगा → लृट् लकार
संकेत शब्द (Signal Words):
हिंदी अनुवाद पहचान: 'गा', 'गी', 'गे' → लृट् लकार जैसे: पढ़ेगा, जाएगा, खाएगी
लृट् लकार में धातु के बाद 'स्य' जोड़कर फिर ये प्रत्यय लगाए जाते हैं:
एकवचन (Singular) | द्विवचन (Dual) | बहुवचन (Plural)
प्रथम पुरुष (He/She/It): स्यति | स्यतः | स्यन्ति मध्यम पुरुष (You): स्यसि | स्यथः | स्यथ उत्तम पुरुष (I/We): स्यामि | स्यावः | स्यामः
नियम: धातु + 'स्य' + ति/तः/न्ति/सि/थः/थ/मि/वः/मः लेकिन ध्यान दें: अंतिम प्रत्यय वही हैं जो लट् लकार में हैं।
भू → भविष्य में: भू + स्य + प्रत्यय
प्रथम पुरुष: भविष्यति | भविष्यतः | भविष्यन्ति मध्यम पुरुष: भविष्यसि | भविष्यथः | भविष्यथ उत्तम पुरुष: भविष्यामि | भविष्यावः | भविष्यामः
नोट: भू → भव् (Guṇa) → भविष्य् (स्य जोड़ने पर) उदाहरण वाक्य:
पठ् → लृट् लकार रूप:
प्रथम पुरुष: पठिष्यति | पठिष्यतः | पठिष्यन्ति मध्यम पुरुष: पठिष्यसि | पठिष्यथः | पठिष्यथ उत्तम पुरुष: पठिष्यामि | पठिष्यावः | पठिष्यामः
नोट: पठ् → पठिष्य (इ-आगम होता है स्य से पहले) उदाहरण:
गम् → लृट् लकार रूप:
प्रथम पुरुष: गमिष्यति | गमिष्यतः | गमिष्यन्ति मध्यम पुरुष: गमिष्यसि | गमिष्यथः | गमिष्यथ उत्तम पुरुष: गमिष्यामि | गमिष्यावः | गमिष्यामः
नोट: गम् → गमिष्य (म् से पहले इ-आगम) उदाहरण:
खाद् → लृट् लकार रूप:
प्रथम पुरुष: खादिष्यति | खादिष्यतः | खादिष्यन्ति मध्यम पुरुष: खादिष्यसि | खादिष्यथः | खादिष्यथ उत्तम पुरुष: खादिष्यामि | खादिष्यावः | खादिष्यामः
उदाहरण:
लिख् → लृट् लकार रूप:
प्रथम पुरुष: लेखिष्यति | लेखिष्यतः | लेखिष्यन्ति मध्यम पुरुष: लेखिष्यसि | लेखिष्यथः | लेखिष्यथ उत्तम पुरुष: लेखिष्यामि | लेखिष्यावः | लेखिष्यामः
नोट: लिख् → लेख् (गुण: इ→ए) → लेखिष्य उदाहरण:
लट् लकार = वर्तमान काल (Present)
लङ् लकार = भूतकाल (Past)
लोट् लकार = आज्ञार्थ (Imperative)
विधिलिङ् लकार = विध्यर्थ (Should)
लृट् लकार = भविष्यत् काल (Future)
लृट् लकार भविष्यत् काल (Future Tense) का प्रतिनिधित्व करता है। जब कोई कार्य आने वाले समय में होगा, तो लृट् लकार का प्रयोग किया जाता है।
लृट् लकार के संकेत शब्द: श्वः (कल), परश्वः (परसों), अग्रे (आगे), भविष्ये (भविष्य में), अनागते (भविष्य में)। हिंदी में 'गा/गी/गे' से पहचानते हैं।
लृट् लकार में धातु के साथ 'स्य' प्रत्यय जोड़कर भविष्यत् रूप बनाया जाता है। जैसे: पठ् + इ + स्य = पठिष्य, फिर आगे ति/तः/न्ति आदि लगते हैं।
पठ् धातु का लृट् लकार प्रथम पुरुष एकवचन 'पठिष्यति' है। अर्थ: वह पढ़ेगा।
भू धातु का लृट् लकार उत्तम पुरुष एकवचन 'भविष्यामि' है। अर्थ: मैं होऊँगा/बनूँगा।
गम् धातु के लृट् लकार में प्रथम पुरुष बहुवचन 'गमिष्यन्ति' है (वे जाएँगे), मध्यम पुरुष बहुवचन 'गमिष्यथ' है (तुम सब जाओगे), उत्तम पुरुष बहुवचन 'गमिष्यामः' है (हम जाएँगे)।
लट् लकार वर्तमान काल (Present) है: सः पठति (वह पढ़ता है)। लृट् लकार भविष्यत् काल (Future) है: सः पठिष्यति (वह पढ़ेगा)। लृट् में 'स्य' प्रत्यय जोड़ा जाता है।
'सः श्वः नगरं गमिष्यति' का हिंदी अनुवाद है: 'वह कल नगर जाएगा।' श्वः = कल (आने वाला), गमिष्यति = जाएगा (गम् धातु, लृट् लकार)।
लिख् धातु में 'इ' स्वर है। लृट् लकार में 'स्य' प्रत्यय जोड़ने से पहले गुण (इ→ए) होता है: लिख् → लेख् → लेखिष्यति। यह संस्कृत में आयाम (Strengthening of root vowel) का नियम है।
लृट् लकार में प्रथम पुरुष बहुवचन में 'स्यन्ति' प्रत्यय होता है: पठिष्यन्ति (वे पढ़ेंगे), गमिष्यन्ति (वे जाएँगे), भविष्यन्ति (वे होंगे)। यह पहचान का आसान तरीका है।
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