Study Guides/Hindi/Shringar Ras Ka Udaharan — श्रृंगार रस का सरल उदाहरण
Study Guide · Hindi

श्रृंगार रस — सरल उदाहरण

श्रृंगार रस हिंदी काव्य का सर्वश्रेष्ठ रस है। इसे 'रसराज' कहा जाता है। इसका स्थायीभाव 'रति' (प्रेम) है। जब काव्य में नायक-नायिका के प्रेम का वर्णन हो, तो श्रृंगार रस होता है। यह दो प्रकार का होता है — संयोग श्रृंगार और वियोग श्रृंगार।

Question (Click to Flip)

श्रृंगार रस का स्थायीभाव क्या है?

Answer

श्रृंगार रस का स्थायीभाव 'रति' (प्रेम) है।

Card 1 of 3 free previews

Key Facts

श्रृंगार रस को 'रसराज' कहा जाता है।

स्थायीभाव: रति (प्रेम)।

भेद: (१) संयोग श्रृंगार — मिलन, (२) वियोग श्रृंगार — विरह।

प्रसिद्ध उदाहरण: 'बतरस लालच लाल की...' (बिहारी) — संयोग श्रृंगार।

सूरदास, बिहारी, मीराबाई श्रृंगार रस के प्रमुख कवि हैं।

श्रृंगार रस की परिभाषा

परिभाषा: जहाँ नायक-नायिका के परस्पर प्रेम, मिलन, विरह का वर्णन हो, वहाँ श्रृंगार रस होता है।

स्थायीभाव: रति (प्रेम) आलंबन विभाव: प्रिय/प्रेमी-प्रेमिका उद्दीपन विभाव: चाँदनी रात, बगीचा, संगीत, प्रकृति अनुभाव: मुस्कुराना, लज्जाना, आँखें झुकाना संचारी भाव: हर्ष, लज्जा, उत्सुकता, आशा

भेद: १. संयोग श्रृंगार — नायक-नायिका का मिलन २. वियोग/विप्रलंभ श्रृंगार — नायक-नायिका का बिछोह/विरह

श्रृंगार रस के सरल उदाहरण

संयोग श्रृंगार (सबसे प्रसिद्ध उदाहरण): "बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय। सौंह करे, भौंहनि हँसे, दैन कहे, नटि जाय।।" — बिहारी

भावार्थ: गोपी ने कृष्ण की मुरली छुपा दी। जब कृष्ण माँगते हैं तो वह सौगंध देती है, भौंहों से हँसती है और देने को कहकर भी देती नहीं — यह प्रेम की चंचलता है।

सरल उदाहरण (संयोग): "प्रियतम को देख मन प्रसन्न हो गया, मुख पर आ गई लाली, मन खो गया।"

वियोग श्रृंगार उदाहरण: "निसिदिन बरसत नैन हमारे, सदा रहत पावस ऋतु हम पर, जबते श्याम सिधारे।।" — सूरदास

भावार्थ: श्याम (कृष्ण) के जाने के बाद गोपी की आँखें रात-दिन रोती रहती हैं। यह वियोग श्रृंगार है।

Questions and Answers

श्रृंगार रस का स्थायीभाव क्या है?+

श्रृंगार रस का स्थायीभाव 'रति' (प्रेम) है।

श्रृंगार रस का सबसे आसान उदाहरण कौन सा है?+

बिहारी का दोहा: 'बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय। सौंह करे, भौंहनि हँसे, दैन कहे, नटि जाय।।' — यह संयोग श्रृंगार का सरल उदाहरण है।

संयोग और वियोग श्रृंगार में क्या अंतर है?+

संयोग श्रृंगार में नायक-नायिका का मिलन होता है और आनंद की अनुभूति होती है। वियोग श्रृंगार में दोनों का बिछोह होता है और विरह की पीड़ा का वर्णन होता है।

More in Hindi

Study Smarter with Shinyu.ai

Turn this guide into revision flashcards, a practice exam, or an AI-generated podcast — free, no signup required.