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अलंकार के कितने भेद होते हैं? (Alankar Ke Prakar)

काव्य की शोभा (सुंदरता) बढ़ाने वाले तत्वों को अलंकार (Alankar) कहते हैं। जिस प्रकार आभूषण (Jewelry) पहनने से मनुष्य की सुंदरता बढ़ती है, उसी प्रकार अलंकार के प्रयोग से कविता की सुंदरता बढ़ती है।

Question (Click to Flip)

शब्दालंकार और अर्थालंकार में मुख्य अंतर क्या है?

Answer

शब्दालंकार बाहरी सुंदरता (शब्दों के खेल) पर निर्भर करता है, यदि शब्द बदल दिया जाए तो अलंकार नष्ट हो जाता है। अर्थालंकार भीतरी सुंदरता (अर्थ) पर निर्भर करता है, इसमें शब्द बदलने (पर्यायवाची रखने) पर भी अलंकार बना रहता है।

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Key Facts

अलंकार संप्रदाय के प्रवर्तक आचार्य भामह (Acharya Bhamaha) को माना जाता है। उनके अनुसार, 'न कान्तमपि निर्भूषं विभाति वनितामुखम्' अर्थात् बिना आभूषण के सुंदर स्त्री का मुख भी शोभित नहीं होता, वैसे ही बिना अलंकार की कविता सुंदर नहीं होती।

अलंकार के मुख्य भेद (Types of Alankar)

मुख्य रूप से अलंकार के दो भेद होते हैं, लेकिन आधुनिक व्याकरण में एक तीसरा भेद भी माना जाता है। इस प्रकार अलंकार के कुल तीन भेद होते हैं:

  1. शब्दालंकार (Shabdalankar): जहाँ शब्दों के कारण कविता में चमत्कार या सुंदरता उत्पन्न हो।
  2. अर्थालंकार (Arthalankar): जहाँ कविता के अर्थ (Meaning) के कारण सुंदरता उत्पन्न हो।
  3. उभयालंकार (Ubhayalankar): जहाँ शब्द और अर्थ दोनों के कारण चमत्कार उत्पन्न हो (यह बोर्ड परीक्षाओं में कम पूछा जाता है)।

1. शब्दालंकार और उसके प्रकार

जब काव्य में किसी विशेष शब्द का प्रयोग करने से सुंदरता आती है, और यदि उस शब्द को हटाकर उसका पर्यायवाची रख दें तो सुंदरता खत्म हो जाए, उसे शब्दालंकार कहते हैं।

शब्दालंकार के 3 मुख्य प्रकार हैं:

  • अनुप्रास अलंकार (Anupras): जहाँ एक ही वर्ण (Letter) की बार-बार आवृत्ति हो। (उदा: रनि नूजा माल...)
  • यमक अलंकार (Yamak): जहाँ एक शब्द एक से अधिक बार आए, लेकिन हर बार अर्थ अलग हो। (उदा: कनक कनक ते सौ गुनी...)
  • श्लेष अलंकार (Shlesh): जहाँ शब्द एक ही बार आए, लेकिन प्रसंग के अनुसार उसके अर्थ कई हों। (उदा: रहिमन पानी राखिए... यहाँ पानी के 3 अर्थ हैं)।

2. अर्थालंकार और उसके प्रकार

जहाँ कविता के अर्थ में चमत्कार या गहराई हो। यदि हम शब्द की जगह उसका पर्यायवाची रख दें, तो भी अलंकार (सुंदरता) बना रहता है।

अर्थालंकार के प्रमुख प्रकार:

  • उपमा अलंकार (Upma): जहाँ दो अलग-अलग वस्तुओं में समानता दिखाई जाए (सा, सी, से, सम)। (उदा: पीपर पात सरिस मन डोला।)
  • रूपक अलंकार (Rupak): जहाँ उपमेय और उपमान में कोई भेद न रहे (दोनो को एक मान लिया जाए)। (उदा: मैया मैं तो चंद्र-खिलौना लैहों।)
  • उत्प्रेक्षा अलंकार (Utpreksha): जहाँ उपमेय में उपमान की संभावना (कल्पना) की जाए (मानो, जानो)। (उदा: मानहुँ नीलमनि सैल पर...)
  • अतिशयोक्ति अलंकार (Atishayokti): जहाँ किसी बात को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कहा जाए। (उदा: हनुमान की पूंछ में, लगन न पाई आग...)
  • मानवीकरण अलंकार (Manavikaran): जहाँ निर्जीव/प्राकृतिक चीजों में इंसानी भावनाओं या कार्यों को दिखाया जाए। (उदा: मेघ आए बड़े बन-ठन के...)

Questions and Answers

शब्दालंकार और अर्थालंकार में मुख्य अंतर क्या है?+

शब्दालंकार बाहरी सुंदरता (शब्दों के खेल) पर निर्भर करता है, यदि शब्द बदल दिया जाए तो अलंकार नष्ट हो जाता है। अर्थालंकार भीतरी सुंदरता (अर्थ) पर निर्भर करता है, इसमें शब्द बदलने (पर्यायवाची रखने) पर भी अलंकार बना रहता है।

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