ईदगाह मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध हिंदी कहानी है, जो 10वीं कक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल है। इस कहानी में हामिद नामक बालक ईद के दिन मेले में खिलौने और मिठाइयाँ खरीदने की बजाय अपनी दादी अमीना के लिए चिमटा खरीदता है। यह कहानी बाल मनोविज्ञान, निःस्वार्थ प्रेम और त्याग का सुंदर चित्रण करती है।
ईदगाह कहानी मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखी गई है और 1933 में प्रकाशित हुई।
मुख्य पात्र हामिद है जो एक अनाथ बालक है और दादी अमीना के साथ रहता है।
हामिद मेले में अपने तीन पैसों से दादी के लिए चिमटा खरीदता है।
हामिद के दोस्त महमूद, मोहसिन और नूरे खिलौने और मिठाइयाँ खरीदते हैं।
चिमटा खरीदने की प्रेरणा: दादी का रोटी सेंकते समय उँगलियाँ जलाना।
यह कहानी त्याग, प्रेम और बाल मनोविज्ञान का अद्भुत चित्रण है।
प्रेमचंद को 'उपन्यास सम्राट' और 'कथा सम्राट' कहा जाता है।
ईदगाह उर्दू और हिंदी दोनों साहित्य की अमर कृति मानी जाती है।
ईदगाह कहानी मुंशी प्रेमचंद ने लिखी है। यह कहानी पहली बार 1933 में प्रकाशित हुई थी। इस कहानी का मुख्य पात्र हामिद है, जो एक अनाथ बालक है और अपनी बूढ़ी दादी अमीना के साथ रहता है। हामिद के माता-पिता का निधन हो चुका है।
ईद का दिन है। हामिद अपने दोस्तों के साथ ईदगाह जाता है। उसके पास केवल तीन पैसे हैं। मेले में उसके दोस्त खिलौने और मिठाइयाँ खरीदते हैं। हामिद एक दुकान पर रुककर चिमटा देखता है और सोचता है कि दादी रोज रोटी सेंकते समय उँगलियाँ जला लेती हैं। वह अपने तीन पैसों से चिमटा खरीद लेता है। घर पहुँचने पर जब दादी अमीना देखती है तो पहले डाँटती है, लेकिन जब हामिद का प्रेम और त्याग समझती है तो उसकी आँखों में आँसू आ जाते हैं।
हामिद: कहानी का नायक, 4-5 वर्ष का अनाथ बालक, बुद्धिमान और परिपक्व सोच वाला। अमीना: हामिद की दादी, बूढ़ी, ममतामयी, गरीब महिला। महमूद, मोहसिन, नूरे: हामिद के साथी बालक जो खिलौने खरीदते हैं।
जब हामिद चिमटे को 'सिपाही' और 'बहादुर' बताकर अपने दोस्तों के खिलौनों से श्रेष्ठ सिद्ध करता है, यह प्रसंग उसकी बालसुलभ चतुराई दर्शाता है। दादी का रोना और हामिद को गले लगाना कहानी का सबसे भावपूर्ण क्षण है।
हामिद ने मेले से चिमटा खरीदा। उसने देखा था कि उसकी दादी अमीना रोज रोटी सेंकते समय हाथ जला लेती हैं। इसलिए उसने खिलौने और मिठाइयों की इच्छा त्यागकर दादी की ज़रूरत को प्राथमिकता दी और अपने तीन पैसों से चिमटा खरीदा।
ईदगाह कहानी मुंशी प्रेमचंद ने लिखी है। यह 1933 में प्रकाशित हुई थी। प्रेमचंद हिंदी और उर्दू साहित्य के महान कथाकार हैं जिन्हें 'उपन्यास सम्राट' कहा जाता है।
दादी अमीना ने पहले हामिद को डाँटा कि वह मेले से खिलौने या मिठाइयाँ लाने की बजाय चिमटा क्यों लाया। लेकिन जब उन्हें समझ आया कि हामिद ने उनकी परवाह में यह किया, तो उनकी आँखों में आँसू आ गए और उनका हृदय भर आया।
ईदगाह कहानी की मुख्य थीम निःस्वार्थ प्रेम और त्याग है। एक छोटा बच्चा हामिद अपनी इच्छाओं का त्याग कर दादी की ज़रूरत को महत्व देता है। यह बाल मनोविज्ञान और पारिवारिक प्रेम का मार्मिक चित्रण है।
हामिद ने चिमटे को 'सिपाही' कहा और बताया कि यह किसी भी खिलौने से ज़्यादा काम का है। उसने कहा कि चिमटा डंडा भी मार सकता है, आग में भी काम आता है, और पानी में डूबता भी नहीं। इस तर्क से उसने अपने दोस्तों के खिलौनों को कमतर साबित किया।
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