Study Guides/Social Science/सविनय अवज्ञा आंदोलन — Civil Disobedience Movement
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सविनय अवज्ञा आंदोलन — 1930 | Civil Disobedience Movement Notes

सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement) 1930 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू हुआ। 'सविनय' का अर्थ है — सभ्यतापूर्ण तरीके से, 'अवज्ञा' का अर्थ है — कानून का उल्लंघन। यह आंदोलन ब्रिटिश नमक कानून के विरोध में दांडी मार्च (Dandi March) से शुरू हुआ और जल्द ही पूरे भारत में फैल गया।

Question (Click to Flip)

सविनय अवज्ञा आंदोलन कब और क्यों शुरू हुआ?

Answer

सविनय अवज्ञा आंदोलन 12 मार्च 1930 को दांडी मार्च से शुरू हुआ। यह ब्रिटिश नमक कर और औपनिवेशिक शासन के विरोध में था। गांधी जी ने नमक कानून तोड़कर ब्रिटिश अन्याय के विरुद्ध जन आंदोलन छेड़ा।

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Key Facts

सविनय अवज्ञा आंदोलन 1930 में गांधी जी के नेतृत्व में शुरू हुआ।

दांडी मार्च: 12 मार्च – 6 अप्रैल 1930; साबरमती आश्रम से दांडी, गुजरात; 241 मील।

6 अप्रैल 1930: गांधी ने दांडी में नमक उठाकर नमक कानून तोड़ा।

गांधी-इरविन समझौता: 5 मार्च 1931 — आंदोलन अस्थायी रूप से स्थगित।

पहला आंदोलन जिसमें महिलाएँ, दलित, किसान, मजदूर सभी शामिल थे।

1934 में गांधी ने आंदोलन वापस लिया।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

मुख्य कारण: • ब्रिटिश सरकार का नमक पर एकाधिकार और भारी नमक कर • 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज (Purna Swaraj) की माँग • साइमन कमीशन का भारतीयों द्वारा बहिष्कार (1928) • बढ़ती बेरोजगारी, भूमि राजस्व की ऊंची दरें • लाहौर अधिवेशन (1929) में कांग्रेस ने पूर्ण स्वतंत्रता का लक्ष्य घोषित किया

गांधी जी की 11 माँगें (1930): • नमक कर हटाओ, भूमि राजस्व घटाओ, मुद्रा विनिमय दर बदलो, सेना खर्च घटाओ आदि • जब ब्रिटिश सरकार ने ये माँगें नहीं मानीं, गांधी ने सत्याग्रह आरंभ किया

दांडी मार्च — नमक सत्याग्रह

दांडी मार्च (Dandi March / Salt March): • आरंभ: 12 मार्च 1930 • समाप्ति: 6 अप्रैल 1930 (24 दिन) • प्रारंभ स्थान: साबरमती आश्रम, अहमदाबाद, गुजरात • समाप्ति स्थान: दांडी गाँव, नवसारी जिला, गुजरात • कुल दूरी: लगभग 241 मील (388 किलोमीटर) • साथी: गांधी जी के 78 अनुयायियों के साथ मार्च

6 अप्रैल 1930: • दांडी पहुँचने पर गांधी ने समुद्र तट से नमक उठाया • नमक कानून (Salt Laws) का उल्लंघन किया • इस कृत्य ने पूरे भारत में सत्याग्रह की लहर पैदा कर दी

आंदोलन का विस्तार

दांडी मार्च के बाद पूरे भारत में सत्याग्रह फैला:

  1. नमक सत्याग्रह: • देश के विभिन्न स्थानों पर लोगों ने नमक बनाया • धरासना (गुजरात): सरोजिनी नायडू के नेतृत्व में धरासना नमक सत्याग्रह

  2. बहिष्कार: • विदेशी कपड़ों, शराब का बहिष्कार • अदालतों, स्कूलों, सरकारी कार्यालयों का बहिष्कार

  3. कर न चुकाना: • किसानों ने भूमि राजस्व देने से इनकार किया • जंगल कानूनों का उल्लंघन

  4. महिलाओं की भागीदारी: • पहली बार महिलाएँ बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल हुईं

  5. आदिवासी, दलित, श्रमिक भी शामिल हुए

गांधी-इरविन समझौता और दूसरा चरण

गांधी-इरविन समझौता (Gandhi-Irwin Pact) — 5 मार्च 1931: • गांधी जी और वायसराय लॉर्ड इरविन के बीच समझौता • शर्तें: — ब्रिटिश सरकार सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा करेगी — समुद्र तट के पास रहने वाले नमक बना सकते हैं — आंदोलन के दौरान जब्त संपत्ति वापस की जाएगी — गांधी आंदोलन बंद करेंगे और द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेंगे

द्वितीय चरण (1932): • गांधी के गोलमेज सम्मेलन से लौटने के बाद आंदोलन पुनः आरंभ • गांधी जी को गिरफ्तार किया गया • पूना पैक्ट (1932): भीमराव अंबेडकर और गांधी के बीच

आंदोलन का अंत: • 1934 में गांधी ने आंदोलन आधिकारिक रूप से वापस लिया

आंदोलन का महत्व

  1. पहला जन आंदोलन: समाज के सभी वर्ग — किसान, मजदूर, महिलाएँ, दलित, आदिवासी — शामिल हुए
  2. महिला सशक्तिकरण: महिलाओं ने सार्वजनिक जीवन में बड़ी भूमिका निभाई
  3. अंतरराष्ट्रीय ध्यान: पूरी दुनिया ने भारत की स्वतंत्रता संग्राम देखी
  4. गांधी की अहिंसा की विजय: बिना हथियार उठाए एक विशाल आंदोलन
  5. ब्रिटिश कानून की अवज्ञा ने औपनिवेशिक शासन की नींव हिलाई

Questions and Answers

सविनय अवज्ञा आंदोलन कब और क्यों शुरू हुआ?+

सविनय अवज्ञा आंदोलन 12 मार्च 1930 को दांडी मार्च से शुरू हुआ। यह ब्रिटिश नमक कर और औपनिवेशिक शासन के विरोध में था। गांधी जी ने नमक कानून तोड़कर ब्रिटिश अन्याय के विरुद्ध जन आंदोलन छेड़ा।

दांडी मार्च क्या था?+

दांडी मार्च 12 मार्च 1930 को महात्मा गांधी और 78 अनुयायियों द्वारा साबरमती आश्रम (अहमदाबाद) से शुरू हुआ। 6 अप्रैल 1930 को 241 मील चलकर दांडी (गुजरात) पहुँचे जहाँ गांधी ने समुद्र से नमक उठाकर ब्रिटिश नमक कानून का उल्लंघन किया।

गांधी-इरविन समझौता क्या था?+

गांधी-इरविन समझौता 5 मार्च 1931 को हुआ। इसमें ब्रिटिश सरकार ने राजनीतिक कैदियों को रिहा करने और समुद्र तट पर नमक बनाने की अनुमति दी। गांधी ने आंदोलन स्थगित कर द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेना स्वीकार किया।

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