Study Guides/History/Jain Dharm Ke Sansthapak
Study Guide · History

जैन धर्म के संस्थापक कौन थे? (Founder of Jainism)

प्राचीन भारतीय इतिहास में जैन धर्म दुनिया के सबसे पुराने और सबसे शांतिप्रिय धर्मों में से एक है। जब भी परीक्षाओं में जैन धर्म के 'संस्थापक' (Founder) के बारे में प्रश्न पूछा जाता है, तो छात्र अक्सर भगवान महावीर का नाम लिखकर बहुत बड़ी गलती कर देते हैं। आइए सही ऐतिहासिक तथ्य को समझते हैं।

Question (Click to Flip)

जैन धर्म का मुख्य सिद्धांत क्या है?

Answer

जैन धर्म का सबसे बड़ा और कठोर सिद्धांत 'अहिंसा' (Non-Violence) है। वे मानते हैं कि हर छोटे से छोटे कीड़े, पौधे और पत्थर में भी जान होती है, इसलिए किसी को भी शारीरिक या मानसिक रूप से चोट नहीं पहुंचानी चाहिए।

Card 1 of 1 free previews

Key Facts

भगवान ऋषभदेव का उल्लेख हिंदुओं के पवित्र ऋग्वेद (Rigveda) और विष्णु पुराण में भी मिलता है, जो यह साबित करता है कि यह धर्म अत्यधिक प्राचीन है।

भगवान ऋषभदेव के सबसे बड़े पुत्र का नाम 'भरत चक्रवर्ती' था। कई प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, इन्हीं महान राजा भरत के नाम पर हमारे देश का नाम 'भारत' (Bharat) पड़ा था।

1. जैन धर्म के मूल संस्थापक (प्रथम तीर्थंकर)

  • जैन धर्म के वास्तविक और प्रथम संस्थापक भगवान ऋषभदेव (Bhagwan Rishabhanatha) थे।
  • उन्हें आदरपूर्वक 'आदिनाथ' (Adinath - जिसका अर्थ है 'प्रथम भगवान') भी कहा जाता है।
  • जैन मान्यताओं के अनुसार, करोड़ों वर्ष पहले उन्होंने ही इंसानों को कृषि (Farming), शिल्प (Craft) और समाज में रहने की कला सिखाई थी। उनके प्रतीक चिह्न के रूप में 'बैल' (Bull) का उपयोग किया जाता है।

2. भगवान महावीर कौन थे? (वास्तविक संस्थापक का अर्थ)

अगर भगवान ऋषभदेव संस्थापक थे, तो भगवान महावीर इतने प्रसिद्ध क्यों हैं?

  • जैन धर्म में कुल 24 तीर्थंकर (महान आध्यात्मिक शिक्षक) हुए हैं। ऋषभदेव पहले थे।
  • भगवान महावीर 24वें और अंतिम तीर्थंकर थे। छठी शताब्दी ईसा पूर्व (600 BC) में, भगवान महावीर ने जैन धर्म के नियमों को कठोरता से लागू किया, उसे पूरे भारत में फैलाया और धर्म को उसका आधुनिक रूप दिया।
  • इसीलिए इतिहासकारों द्वारा भगवान महावीर को जैन धर्म का 'वास्तविक संस्थापक' (Real Founder) माना जाता है, क्योंकि उन्होंने धर्म का पुनरुद्धार (Revival) किया था।

3. 23वें तीर्थंकर: भगवान पार्श्वनाथ

महावीर स्वामी से ठीक पहले 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ थे। वे काशी (वाराणसी) के एक महान राजकुमार थे, जिन्होंने राजपाट छोड़कर संन्यास ले लिया था। जैन धर्म के प्रमुख चार महाव्रत (सत्य, अहिंसा, अस्तेय, और अपरिग्रह) मूल रूप से पार्श्वनाथ जी ने ही दिए थे। महावीर स्वामी ने इसमें पांचवा व्रत 'ब्रह्मचर्य' जोड़ा था।

Questions and Answers

जैन धर्म का मुख्य सिद्धांत क्या है?+

जैन धर्म का सबसे बड़ा और कठोर सिद्धांत **'अहिंसा'** (Non-Violence) है। वे मानते हैं कि हर छोटे से छोटे कीड़े, पौधे और पत्थर में भी जान होती है, इसलिए किसी को भी शारीरिक या मानसिक रूप से चोट नहीं पहुंचानी चाहिए।

More in History

Study Smarter with Shinyu.ai

Turn this guide into revision flashcards, a practice exam, or an AI-generated podcast — free, no signup required.