शब्द शक्ति हिंदी व्याकरण और काव्यशास्त्र का एक महत्वपूर्ण विषय है। शब्द की वह शक्ति या सामर्थ्य जिसके द्वारा वह अपना अर्थ प्रकट करता है, उसे शब्द शक्ति कहते हैं। प्रत्येक शब्द का कोई न कोई अर्थ होता है, और शब्द जिस सामर्थ्य से उस अर्थ का बोध कराता है, वही शब्द शक्ति है। शब्द शक्ति के तीन भेद हैं – अभिधा, लक्षणा और व्यंजना। इस लेख में शब्द शक्ति की परिभाषा, भेद और उदाहरण दिए गए हैं।
शब्द की जिस शक्ति से अर्थ का बोध होता है, उसे शब्द शक्ति कहते हैं।
शब्द शक्ति के तीन भेद हैं – अभिधा, लक्षणा और व्यंजना।
अभिधा से मुख्य/सीधा अर्थ (वाच्यार्थ) मिलता है।
लक्षणा से जुड़ा हुआ अर्थ (लक्ष्यार्थ) मिलता है।
व्यंजना से छिपा/सुझाया अर्थ (व्यंग्यार्थ) मिलता है।
'वह गधा है' – लक्षणा का उदाहरण (गधा = मूर्ख)।
व्यंजना काव्य में सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है।
शब्द की जिस शक्ति (सामर्थ्य) के द्वारा उसके अर्थ का बोध होता है, उसे शब्द शक्ति कहते हैं।
दूसरे शब्दों में – शब्द और अर्थ के संबंध को प्रकट करने वाली शक्ति को शब्द शक्ति कहते हैं।
शब्द शक्ति के तीन भेद होते हैं:
इनके अनुसार शब्द के तीन प्रकार के अर्थ होते हैं – वाच्यार्थ (मुख्य अर्थ), लक्ष्यार्थ (लक्षित अर्थ) और व्यंग्यार्थ (व्यंजित/सुझाया गया अर्थ)।
अभिधा शब्द शक्ति: शब्द की जिस शक्ति से उसका मुख्य या सीधा (शब्दकोशीय) अर्थ प्रकट होता है, उसे अभिधा कहते हैं। इससे प्राप्त अर्थ को 'वाच्यार्थ' या 'मुख्यार्थ' कहते हैं। उदाहरण: 'गाय घास खाती है।' – यहाँ 'गाय' का सीधा अर्थ पशु गाय है।
लक्षणा शब्द शक्ति: जब किसी शब्द का मुख्य अर्थ ठीक न बैठे और उससे जुड़ा कोई दूसरा अर्थ लिया जाए, तो उस शक्ति को लक्षणा कहते हैं। इससे प्राप्त अर्थ को 'लक्ष्यार्थ' कहते हैं। उदाहरण: 'वह गधा है।' – यहाँ 'गधा' का अर्थ पशु नहीं, बल्कि 'मूर्ख व्यक्ति' है। उदाहरण: 'गंगा पर गाँव है।' – यहाँ 'गंगा' का अर्थ 'गंगा का किनारा' है।
उदाहरण: 'सूरज ढल गया।' – इसका सीधा अर्थ है कि शाम हो गई, परन्तु व्यंजना से इसका अर्थ हो सकता है – 'अब घर लौट चलो', 'काम बंद कर दो', या 'समय बीत गया' आदि (प्रसंग के अनुसार)।
संक्षेप में: • अभिधा → मुख्यार्थ (सीधा अर्थ) • लक्षणा → लक्ष्यार्थ (जुड़ा हुआ अर्थ) • व्यंजना → व्यंग्यार्थ (छिपा/सुझाया अर्थ)
शब्द की जिस शक्ति या सामर्थ्य के द्वारा उसके अर्थ का बोध होता है, उसे शब्द शक्ति कहते हैं। यह शब्द और अर्थ के संबंध को प्रकट करने वाली शक्ति है। शब्द शक्ति के तीन भेद होते हैं – अभिधा, लक्षणा और व्यंजना।
शब्द शक्ति के तीन भेद हैं – (1) अभिधा (जिससे मुख्य/सीधा अर्थ मिलता है), (2) लक्षणा (जिससे जुड़ा हुआ अर्थ मिलता है), और (3) व्यंजना (जिससे छिपा या सुझाया गया अर्थ मिलता है)।
अभिधा शब्द शक्ति से शब्द का मुख्य/सीधा अर्थ (वाच्यार्थ) प्रकट होता है, जैसे 'गाय' का अर्थ पशु गाय। लक्षणा शब्द शक्ति तब प्रयोग होती है जब मुख्य अर्थ ठीक न बैठे और कोई जुड़ा हुआ अर्थ (लक्ष्यार्थ) लिया जाए, जैसे 'वह गधा है' में 'गधा' का अर्थ मूर्ख व्यक्ति।
व्यंजना वह शब्द शक्ति है जिससे मुख्य और लक्षित अर्थ के अतिरिक्त कोई छिपा हुआ (सुझाया गया) अर्थ प्रकट होता है, जिसे व्यंग्यार्थ कहते हैं। उदाहरण – 'सूरज ढल गया' का सीधा अर्थ शाम होना है, परन्तु व्यंजना से इसका अर्थ 'अब घर चलो' या 'काम बंद करो' भी हो सकता है।
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