संवाद लेखन (Samvad Lekhan) का अर्थ है — दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच होने वाली बातचीत को लिखित रूप देना। संवाद में भाषा सरल, स्वाभाविक और विषय के अनुकूल होती है। यह हिंदी परीक्षाओं में Class 6 से Class 10 तक पूछा जाने वाला महत्वपूर्ण विषय है।
संवाद लेखन में भाषा सरल, स्वाभाविक और बोलचाल की होती है।
प्रत्येक बोलने वाले का नाम + कोलन (:) के बाद उसकी बात लिखें।
संवाद विषयानुकूल, तार्किक और छोटे-छोटे वाक्यों में होने चाहिए।
आरंभ और अंत स्वाभाविक हो।
विराम चिह्नों का सही प्रयोग करें।
संवाद लिखते समय ध्यान देने योग्य बातें:
राम: अरे मोहन, आजकल बहुत किताबों में डूबे रहते हो। क्या बात है?
मोहन: हाँ राम, परीक्षाएँ नजदीक हैं। मैं पूरी तैयारी में लगा हूँ।
राम: सच में? तुम तो हमेशा से होशियार हो। मुझे भी कोई उपाय बताओ।
मोहन: देखो राम, नियमित पढ़ाई करो। प्रत्येक दिन थोड़ा-थोड़ा पढ़ने से सब याद हो जाता है।
राम: लेकिन मेरा मन नहीं लगता। क्या करूँ?
मोहन: पहले लक्ष्य निर्धारित करो — आज इतना पढ़ूँगा। फिर देखो मन लगेगा।
राम: ठीक है। कल से हम दोनों साथ पढ़ेंगे। तुम मुझे गणित समझाओ, मैं तुम्हें विज्ञान।
मोहन: बिल्कुल! साथ पढ़ने से जल्दी समझ में आता है। कल शाम 4 बजे मेरे घर आ जाओ।
शिक्षक: अरुण, तुम आज विद्यालय देर से क्यों आए?
अरुण: सर, माफ़ करें। बस थोड़ी देर से आई और मैं उसमें चूक गया।
शिक्षक: यह बहाना तो नहीं? तुम तो होशियार छात्र हो, लेकिन देर से आना ठीक नहीं।
अरुण: सर, आगे से ऐसा नहीं होगा। मैं कल से समय से पहले पहुँचूँगा।
शिक्षक: शाबाश। समय की पाबंदी एक महत्वपूर्ण गुण है। इसे जीवन में हमेशा अपनाओ।
अरुण: जी सर, आपकी बात हमेशा याद रखूँगा।
सीमा: प्रिया, तुमने देखा? हमारे पास की नदी कितनी गंदी हो गई है।
प्रिया: हाँ सीमा। कारखानों का कचरा और शहर का गंदा पानी नदी में छोड़ा जा रहा है।
सीमा: यह तो बहुत खराब है। हम कुछ कर सकते हैं क्या?
प्रिया: हाँ जरूर! हम विद्यालय में एक अभियान चला सकते हैं — 'नदी बचाओ, जीवन बचाओ'।
सीमा: यह विचार अच्छा है। हम प्रधानाचार्य जी से भी बात कर सकते हैं।
प्रिया: बिल्कुल। और हम नदी के किनारे कभी कूड़ा नहीं फेंकेंगे। दूसरों को भी समझाएँगे।
संवाद लेखन वह विधा है जिसमें दो या अधिक व्यक्तियों के बीच होने वाली बातचीत को लिखित रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इसमें भाषा सरल, स्वाभाविक और विषय के अनुकूल होती है। प्रत्येक व्यक्ति का नाम और उसकी बात अलग-अलग लिखी जाती है।
संवाद लेखन के नियम: (1) भाषा सरल और बोलचाल की हो। (2) नाम के बाद कोलन लगाएँ। (3) संवाद छोटे और स्पष्ट हों। (4) विषय के अनुसार शब्दों का प्रयोग हो। (5) आरंभ और अंत स्वाभाविक हो।
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