हिंदी व्याकरण (Hindi Grammar) में वाक्यों को भारी और सही अर्थ देने के लिए कारक (Karak) सबसे विशाल भूमिका निभाते हैं। अगर हम किसी वाक्य से भारी 'कारक चिह्नों' (जैसे - ने, को, से, में, पर) को हटा दें, तो वाक्य का पूरा भारी अर्थ ही भयंकर रूप से नष्ट हो जाएगा। (उदाहरण: 'राम रावण मारा' - यह गलत है। 'राम ने रावण को मारा' - यह सही है)।
संस्कृत भाषा में कारक चिह्नों को 'विभक्ति' कहा जाता है। संस्कृत में शब्द का रूप भारी तरह बदल जाता है (जैसे राम: रामम् रामेण), लेकिन हिंदी में हम भारी अलग शब्द (परसर्ग) लगाते हैं।
हिंदी में पूरे 8 कारक होते हैं। इन्हें याद करने की यह सबसे विशाल और अमर ट्रिक है:
बिल्कुल नहीं! हिंदी का यह भारी नियम है कि 'ने' का उपयोग केवल भारी **भूतकाल (Past Tense)** में ही होता है। वर्तमान में नहीं। (मैं रोटी खाता हूँ - यहाँ 'ने' भारी रूप से छिपा हुआ है / मैंने रोटी खाई - यह भूतकाल है)।
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