द्वंद्व समास हिंदी व्याकरण के समास का एक प्रमुख भेद है। 'समास' का अर्थ है दो या दो से अधिक शब्दों का मेल। द्वंद्व समास में दोनों पद (शब्द) प्रधान होते हैं, अर्थात दोनों का समान महत्व होता है। इसका विग्रह करते समय बीच में 'और', 'या' अथवा 'एवं' जैसे योजक शब्द लगते हैं। जैसे – 'माता-पिता' का विग्रह है 'माता और पिता'। इस लेख में द्वंद्व समास की परिभाषा, पहचान और उदाहरण विस्तार से दिए गए हैं।
द्वंद्व समास में दोनों पद प्रधान होते हैं।
विग्रह करने पर बीच में 'और', 'या', 'अथवा', 'एवं' आता है।
उदाहरण: माता-पिता = माता और पिता।
प्रायः दोनों पदों के बीच योजक चिह्न (-) लगा होता है।
तत्पुरुष समास में उत्तर पद प्रधान, पर द्वंद्व में दोनों पद प्रधान होते हैं।
अन्य उदाहरण: राजा-रानी, भाई-बहन, दिन-रात, सुख-दुख।
द्वंद्व समास, समास के छह भेदों में से एक है।
जिस समास में दोनों पद प्रधान हों और उनके बीच 'और', 'या', 'अथवा', 'एवं' जैसे योजक (समुच्चयबोधक) शब्द छिपे हों, उसे द्वंद्व समास कहते हैं।
विग्रह करने पर ये योजक शब्द प्रकट हो जाते हैं।
उदाहरण: • माता-पिता = माता और पिता • राजा-रानी = राजा और रानी • दिन-रात = दिन और रात
यहाँ दोनों पद बराबर महत्व के हैं और बीच में 'और' लगा है — इसलिए ये द्वंद्व समास के उदाहरण हैं।
द्वंद्व समास को पहचानने के मुख्य तरीके:
ध्यान दें: • तत्पुरुष समास में बाद वाला (उत्तर) पद प्रधान होता है। • द्वंद्व समास में दोनों पद प्रधान होते हैं — यही मुख्य अंतर है।
कुछ प्रमुख उदाहरण (समस्तपद = विग्रह):
• माता-पिता = माता और पिता • राजा-रानी = राजा और रानी • भाई-बहन = भाई और बहन • दिन-रात = दिन और रात • सुख-दुख = सुख और दुख • पाप-पुण्य = पाप और पुण्य • आगे-पीछे = आगे और पीछे • ऊँच-नीच = ऊँच और नीच • हानि-लाभ = हानि और लाभ • नर-नारी = नर और नारी • सीता-राम = सीता और राम • गंगा-यमुना = गंगा और यमुना • अन्न-जल = अन्न और जल • खरा-खोटा = खरा और खोटा
जिस समास में दोनों पद प्रधान हों और उनके बीच 'और', 'या', 'अथवा', 'एवं' जैसे योजक शब्द छिपे हों, उसे द्वंद्व समास कहते हैं। विग्रह करने पर ये योजक प्रकट हो जाते हैं। जैसे – माता-पिता = माता और पिता।
द्वंद्व समास की पहचान यह है कि इसमें दोनों पद समान रूप से प्रधान होते हैं, और विग्रह करने पर उनके बीच 'और/या/अथवा' लगता है। प्रायः दोनों पदों के बीच योजक चिह्न (-) भी होता है, जैसे 'सुख-दुख', 'भाई-बहन'।
द्वंद्व समास के पाँच उदाहरण – (1) माता-पिता = माता और पिता, (2) राजा-रानी = राजा और रानी, (3) दिन-रात = दिन और रात, (4) सुख-दुख = सुख और दुख, (5) भाई-बहन = भाई और बहन।
द्वंद्व समास में दोनों पद प्रधान होते हैं और विग्रह में 'और/या' लगता है (जैसे माता-पिता)। तत्पुरुष समास में बाद वाला (उत्तर) पद प्रधान होता है और बीच में विभक्ति का लोप होता है (जैसे राजकुमार = राजा का कुमार)। यही दोनों में मुख्य अंतर है।
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