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हिंदी लोकोक्तियाँ – अर्थ और वाक्य प्रयोग (Hindi Lokoktiyan)

लोकोक्ति (Proverb) वह पूर्ण कथन है जो लोक अनुभव पर आधारित होता है और जनसामान्य में प्रचलित है। यह एक पूर्ण वाक्य होता है जो अपने आप में एक सत्य को संक्षिप्त रूप में कहता है। जैसे 'अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता' का अर्थ है – एक व्यक्ति से बड़ा काम नहीं होता।

Question (Click to Flip)

लोकोक्ति किसे कहते हैं?

Answer

लोकोक्ति वह पूर्ण कथन है जो लोक अनुभव पर आधारित होता है और जनसामान्य में प्रचलित है। यह एक पूर्ण वाक्य होता है। जैसे: 'अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता।'

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Key Facts

लोकोक्ति = पूर्ण वाक्य (मुहावरे से अंतर)

अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता = एक से बड़ा काम नहीं

घर का भेदी लंका ढाए = अपने ही नुकसान करते हैं

दूर के ढोल सुहाने = दूर की चीज अच्छी लगती है

नाच न जाने आँगन टेढ़ा = खुद की कमी, दोष दूसरे को

मन के हारे हार है = सफलता इच्छाशक्ति पर

सौ सुनार की, एक लुहार की = एक कड़ा झटका बेहतर

करत-करत अभ्यास = निरंतर अभ्यास से विजय

लोकोक्ति की परिभाषा और मुहावरे से अंतर

लोकोक्ति:

  • पूर्ण वाक्य होती है
  • स्वयं में एक सूक्ति/उपदेश
  • लोक अनुभव पर आधारित
  • उदाहरण: 'नाच न जाने आँगन टेढ़ा'

मुहावरा:

  • वाक्यांश होता है (पूर्ण वाक्य नहीं)
  • वाक्य में क्रिया/विशेषण के रूप में आता है
  • उदाहरण: 'नाक कटना'

याद रखें: लोकोक्ति स्वयं वाक्य है; मुहावरा वाक्य का हिस्सा है।

अ, आ, इ, क वाली प्रमुख लोकोक्तियाँ

  1. अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता अर्थ: एक व्यक्ति के प्रयास से बड़ा काम नहीं होता वाक्य: इस विशाल परियोजना के लिए टीम चाहिए, अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता।

  2. अब पछताए होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गईं खेत अर्थ: समय निकल जाने पर पछताने से कोई लाभ नहीं वाक्य: परीक्षा देने के बाद रोने से क्या फायदा – अब पछताए होत क्या...

  3. आम के आम गुठलियों के दाम अर्थ: दोहरा लाभ मिलना वाक्य: पुरानी किताबें बेचने से पैसे भी मिले और जगह भी खाली हुई – आम के आम गुठलियों के दाम।

  4. आँख का अंधा नाम नैनसुख अर्थ: नाम और गुण में विपरीतता वाक्य: वह मोटा होकर 'दुबला' कहलाता है – आँख का अंधा नाम नैनसुख।

  5. काठ की हाँडी बार-बार नहीं चढ़ती अर्थ: धोखा एक बार ही चल सकता है, बार-बार नहीं वाक्य: पहले उसने झूठ बोलकर काम निकाल लिया, पर काठ की हाँडी बार-बार नहीं चढ़ती।

  6. करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान अर्थ: निरंतर अभ्यास से मूर्ख भी विद्वान बन जाता है वाक्य: रोज पढ़ने से उसने कठिन विषय समझ लिया – करत-करत अभ्यास के...

ग, घ, च, ज, त वाली प्रमुख लोकोक्तियाँ

  1. गरज सावन भादो – भरी और खाली बाल्टी की तरह या – गरजने वाले बरसते नहीं अर्थ: जो अधिक धमकी देते हैं वे काम कम करते हैं वाक्य: वह खूब डराता है पर कुछ करता नहीं – गरजने वाले बरसते नहीं।

  2. घर का भेदी लंका ढाए अर्थ: अपने घर का राज जानने वाला अधिक नुकसान कर सकता है वाक्य: कंपनी का रहस्य बाहर गया – घर का भेदी लंका ढाता है।

  3. चोर की दाढ़ी में तिनका अर्थ: गलत काम करने वाला हमेशा डरा रहता है वाक्य: जब उससे पूछा तो वह घबरा गया – चोर की दाढ़ी में तिनका।

  4. जैसा बोएगा, वैसा काटेगा अर्थ: जो करोगे, वही भोगोगे वाक्य: उसने बुरा किया, अब दुख पा रहा है – जैसा बोओगे, वैसा काटोगे।

  5. तेली का तेल जले, मशालची की छाती जले अर्थ: एक का खर्च और दूसरे को जलन वाक्य: उसकी तरक्की पर पड़ोसी जलता है – तेली का तेल जले...

द, न, प, ब वाली प्रमुख लोकोक्तियाँ

  1. दूध का जला छाछ भी फूँककर पीता है अर्थ: एक बार धोखा खाने के बाद सावधान हो जाना वाक्य: एक बार ठगा जा चुका है, इसलिए वह सावधान रहता है – दूध का जला छाछ भी फूँककर पीता है।

  2. दूर के ढोल सुहाने अर्थ: जो दूर है वह अच्छा लगता है, पास आने पर नहीं वाक्य: विदेश आकर्षक लगता था, पर यहाँ आने पर कठिनाइयाँ पता चलीं – दूर के ढोल सुहाने।

  3. नाच न जाने आँगन टेढ़ा अर्थ: खुद अयोग्य हो पर दोष दूसरों को देना वाक्य: खेल नहीं आता तो मैदान को दोष देता है – नाच न जाने आँगन टेढ़ा।

  4. नानी याद आना नोट: यह लोकोक्ति नहीं मुहावरा है।

  5. पानी में रहकर मगर से बैर अर्थ: जिस पर निर्भर हो उससे दुश्मनी उचित नहीं वाक्य: अपने ही मालिक से झगड़ा – पानी में रहकर मगर से बैर!

  6. बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद अर्थ: मूर्ख को अच्छी चीज की कद्र नहीं वाक्य: उसे कविता की समझ नहीं – बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद।

भ, म, स, ह वाली प्रमुख लोकोक्तियाँ

  1. भागते भूत की लँगोटी भली अर्थ: जो कुछ मिले वही संतोषजनक है वाक्य: कुछ नहीं मिला तो कम से कम इतना तो मिला – भागते भूत की लँगोटी भली।

  2. मन के हारे हार है, मन के जीते जीत अर्थ: सफलता-असफलता मन के दृढ़ निश्चय पर निर्भर है वाक्य: हौसला रखो – मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।

  3. मुँह में राम बगल में छुरी अर्थ: ऊपर से मित्र और अंदर से शत्रु वाक्य: दोस्त बनकर उसने धोखा दिया – मुँह में राम बगल में छुरी।

  4. सौ सुनार की, एक लुहार की अर्थ: एक कड़ा झटका, सैकड़ों हल्के वारों से बेहतर वाक्य: एक बार सख्ती से काम चल गया – सौ सुनार की, एक लुहार की।

  5. हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और अर्थ: कहते कुछ हैं, करते कुछ और वाक्य: वादे कुछ और थे, काम कुछ और किया – हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और।

  6. एक हाथ से ताली नहीं बजती अर्थ: झगड़े में दोनों पक्षों का दोष होता है वाक्य: लड़ाई दोनों ने की – एक हाथ से ताली नहीं बजती।

परीक्षा के लिए अतिरिक्त लोकोक्तियाँ

  1. जहाँ न जाए रवि, वहाँ जाए कवि अर्थ: कवि की कल्पना अनंत है

  2. थोथा चना बाजे घना अर्थ: कम ज्ञान वाले अधिक बोलते हैं

  3. ऊँची दुकान फीका पकवान अर्थ: दिखावा अधिक, वास्तविकता कम

  4. जहाँ चाह, वहाँ राह अर्थ: इच्छाशक्ति हो तो रास्ता निकल आता है

  5. समय के साथ बहने वाला डूबता नहीं अर्थ: परिस्थिति के अनुकूल ढलना चाहिए

  6. लातों के भूत बातों से नहीं मानते अर्थ: जो बातों से न समझे, उसे कड़ाई की जरूरत

  7. खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे अर्थ: असफल होने पर क्रोध उतारना

  8. सुबह का भूला शाम को घर आए तो भूला नहीं कहाते अर्थ: जो गलती से सुधर जाए उसे माफ करना चाहिए

Questions and Answers

लोकोक्ति किसे कहते हैं?+

लोकोक्ति वह पूर्ण कथन है जो लोक अनुभव पर आधारित होता है और जनसामान्य में प्रचलित है। यह एक पूर्ण वाक्य होता है। जैसे: 'अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता।'

'घर का भेदी लंका ढाए' का अर्थ और वाक्य दीजिए।+

अर्थ: अपने घर का रहस्य जानने वाला सबसे अधिक नुकसान पहुंचा सकता है। वाक्य: कंपनी का रहस्य बाहर चला गया – घर का भेदी लंका ढाता है।

'नाच न जाने आँगन टेढ़ा' का अर्थ बताइए।+

अर्थ: खुद अयोग्य हो पर दोष दूसरों को देना। वाक्य: परीक्षा में असफल होने पर शिक्षक को दोष देता है – नाच न जाने आँगन टेढ़ा।

'दूध का जला छाछ भी फूँककर पीता है' का क्या अर्थ है?+

अर्थ: एक बार धोखा खाने के बाद व्यक्ति सावधान हो जाता है। वाक्य: एक बार ठगा जा चुका है, इसलिए अब सावधान रहता है।

लोकोक्ति और मुहावरे में क्या अंतर है?+

लोकोक्ति: पूर्ण वाक्य, स्वयं में उक्ति (जैसे: 'अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता')। मुहावरा: वाक्यांश, वाक्य का हिस्सा (जैसे: 'नाक कटना')। लोकोक्ति स्वतंत्र वाक्य है; मुहावरा वाक्य में जुड़ता है।

'थोथा चना बाजे घना' का क्या अर्थ है?+

अर्थ: जिसे कम ज्ञान होता है, वह अधिक बोलता है। वाक्य: उसे कुछ नहीं आता फिर भी सबसे अधिक बोलता है – थोथा चना बाजे घना।

'जैसा बोएगा, वैसा काटेगा' का अर्थ और वाक्य दीजिए।+

अर्थ: जो करोगे, वही भोगोगे। कर्म का फल मिलता है। वाक्य: उसने बुरा किया, अब दुख पा रहा है – जैसा बोओगे, वैसा काटोगे।

'हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और' का अर्थ बताइए।+

अर्थ: कहने में कुछ और, करने में कुछ और होना। दोगलापन। वाक्य: उसने वादा कुछ किया था, काम कुछ और किया – हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और।

'आम के आम गुठलियों के दाम' का अर्थ दीजिए।+

अर्थ: दोहरा लाभ उठाना। वाक्य: पुरानी किताबें बेचने से पैसे भी मिले और जगह भी खाली हुई – आम के आम गुठलियों के दाम।

'मन के हारे हार है, मन के जीते जीत' का अर्थ लिखिए।+

अर्थ: सफलता और असफलता मन की दृढ़ता पर निर्भर है। जो मन से हार मान ले, वह हार जाता है; जो मन से मजबूत रहे, वह जीत जाता है। वाक्य: हौसला मत तोड़ो – मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।

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