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वीभत्स रस की परिभाषा और आसान उदाहरण (Vibhats Ras)

हिंदी व्याकरण (काव्यशास्त्र) में रस का बहुत महत्व है। जब हम कोई ऐसी कविता या दृश्य पढ़ते हैं जिससे मन में घृणा (Disgust) या ग्लानि पैदा होती है, तो वहाँ वीभत्स रस (Vibhats Ras) होता है।

Question (Click to Flip)

वीभत्स रस का स्थायी भाव क्या है?

Answer

वीभत्स रस का स्थायी भाव 'जुगुप्सा' (Jugupsa) या 'घृणा' (Disgust/Hatred) होता है।

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Key Facts

रस का नाम: वीभत्स रस (Vibhats Ras).

स्थायी भाव: जुगुप्सा (घृणा / Disgust).

आलंबन (कारण): सड़े-गले शव, खून, हड्डियाँ, मांस।

अनुभाव (प्रतिक्रिया): नाक-भौं सिकोड़ना, थूकना, मुँह फेर लेना।

वीभत्स रस की परिभाषा

काव्य में जब किसी अत्यंत घिनौने, सड़े-गले, या खून-खराबे वाले दृश्य का वर्णन किया जाता है, जिसे पढ़कर या सुनकर मन में घृणा उत्पन्न हो जाए, वहाँ 'वीभत्स रस' होता है।

  • स्थायी भाव (Sthayi Bhav): जुगुप्सा (Jugupsa) या घृणा (Disgust)।

सबसे आसान उदाहरण (Easy Example)

परीक्षाओं (Class 10 Board) के लिए यह सबसे प्रसिद्ध और आसान उदाहरण है:

सिर पर बैठ्यो काग, आँख दोउ खात निकारत। खींचत जीभहिं स्यार, अतिहि आनंद उर धारत।। गिद्ध जांघ को खोदि-खोदि कै मांस उपारत। स्वान आंगुरिन काटि-काटि कै खात विदारत।।

स्पष्टीकरण (Explanation): इस कविता में एक युद्ध के मैदान (या श्मशान) का वर्णन है जहाँ मृत शरीर पड़े हैं। एक कौआ (काग) सिर पर बैठकर आँखें निकाल कर खा रहा है, सियार (स्यार) जीभ खींच रहा है, और गिद्ध तथा कुत्ते (स्वान) शरीर का मांस नोच कर खा रहे हैं। इस दृश्य को पढ़ते ही मन में गहरी घृणा (जुगुप्सा) उत्पन्न होती है, इसलिए यह वीभत्स रस का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।

Questions and Answers

वीभत्स रस का स्थायी भाव क्या है?+

वीभत्स रस का स्थायी भाव 'जुगुप्सा' (Jugupsa) या 'घृणा' (Disgust/Hatred) होता है।

वीभत्स रस किसे कहते हैं?+

जब काव्य में किसी घिनौने, मांस, रक्त, या दुर्गंध युक्त दृश्य का वर्णन पढ़कर मन में अत्यंत घृणा का भाव उत्पन्न हो, तो उसे वीभत्स रस कहते हैं।

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