Study Guides/Hindi/Anupras Alankar Paribhasha aur Udaharan
Study Guide · Hindi

अनुप्रास अलंकार — परिभाषा, भेद और उदाहरण

अनुप्रास अलंकार (Anupras Alankar) शब्दालंकार का सबसे प्रमुख और सबसे आसान भेद है। यह कविताओं में एक संगीतात्मक लय (Rhythm) पैदा करता है।

Question (Click to Flip)

क्या अनुप्रास अलंकार में स्वरों (Vowels) का समान होना जरूरी है?

Answer

नहीं! अनुप्रास अलंकार में केवल व्यंजन (Consonants) वर्णों की आवृत्ति देखी जाती है, उन पर लगी मात्राओं (स्वरों) का समान होना आवश्यक नहीं है। (जैसे: रघुपति, राघव, राजाराम — यहाँ 'र', 'रा', 'रा' में स्वर अलग हैं, लेकिन व्यंजन 'र' समान है, इसलिए यह अनुप्रास है)।

Card 1 of 1 free previews

Key Facts

अंग्रेजी व्याकरण (English Grammar) में अनुप्रास अलंकार को Alliteration (एलिटरेशन) कहा जाता है। (उदाहरण: She Sells Sea Shells on the Sea Shore — यहाँ 'S' वर्ण का अनुप्रास है)।

अनुप्रास अलंकार की परिभाषा

'अनु' का अर्थ है - बार-बार, और 'प्रास' का अर्थ है - वर्ण (Letter/Alphabet)।

परिभाषा: "जब किसी काव्य (कविता) में किसी एक वर्ण (अक्षर/व्यंजन) की आवृत्ति (Repetition) एक से अधिक बार होती है, तो वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।"

सरल शब्दों में: जब कोई एक अक्षर बार-बार आए और उससे कविता में सुंदरता पैदा हो, उसे अनुप्रास अलंकार कहते हैं।

अनुप्रास अलंकार के सबसे आसान उदाहरण

परीक्षाओं में लिखने के लिए ये उदाहरण सबसे अच्छे हैं:

  1. चारु चंद्र की चंचल किरणें, खेल रही थीं जल थल में। (स्पष्टीकरण: यहाँ '' वर्ण की आवृत्ति 3 बार हुई है।)

  2. तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए। (स्पष्टीकरण: यहाँ '' वर्ण की आवृत्ति 5 बार हुई है।)

  3. रघुपति राघव राजाराम, पतित पावन सीताराम। (स्पष्टीकरण: यहाँ '' वर्ण की आवृत्ति 4 बार हुई है।)

  4. मुदित महीपति मंदिर आए, सेवक सचिव सुमंत बुलाए। (स्पष्टीकरण: पहली पंक्ति में '' और दूसरी पंक्ति में '' वर्ण की आवृत्ति हुई है।)

अनुप्रास अलंकार के 5 भेद (Types of Anupras)

यद्यपि स्कूल स्तर पर केवल 'अनुप्रास' ही पूछा जाता है, उच्च स्तर पर इसके 5 भेद होते हैं:

  1. छेकानुप्रास: जहाँ वर्ण केवल दो बार आए। (उदा: बंदउँ गुरु दुम रागा)
  2. वृत्यानुप्रास: जहाँ वर्ण तीन या अधिक बार आए। (उदा: रनि नूजा...)
  3. लाटानुप्रास: जहाँ पूरा शब्द या वाक्य दोहराया जाए लेकिन अर्थ वही रहे (तात्पर्य बदल जाए)। (उदा: पूत कपूत तो का धन संचय, पूत सपूत तो का धन संचय)
  4. अंत्यानुप्रास: जहाँ पंक्तियों के अंत में तुक (Rhyme) मिले। (उदा: जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुं लोक उजागर)
  5. श्रुत्यानुप्रास: जहाँ एक ही उच्चारण स्थान (जैसे केवल होंठ या केवल तालु) से बोले जाने वाले वर्णों की आवृत्ति हो।

Questions and Answers

क्या अनुप्रास अलंकार में स्वरों (Vowels) का समान होना जरूरी है?+

नहीं! अनुप्रास अलंकार में केवल **व्यंजन (Consonants) वर्णों** की आवृत्ति देखी जाती है, उन पर लगी मात्राओं (स्वरों) का समान होना आवश्यक नहीं है। (जैसे: रघुपति, राघव, राजाराम — यहाँ 'र', 'रा', 'रा' में स्वर अलग हैं, लेकिन व्यंजन 'र' समान है, इसलिए यह अनुप्रास है)।

More in Hindi

Study Smarter with Shinyu.ai

Turn this guide into revision flashcards, a practice exam, or an AI-generated podcast — free, no signup required.