भारतीय संविधान 26 नवंबर 1949 को अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। यह दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है। संविधान में मूल रूप से 395 अनुच्छेद, 8 अनुसूचियाँ थीं। अब 448 अनुच्छेद और 12 अनुसूचियाँ हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण अनुच्छेद जानना आवश्यक है।
संविधान अपनाया: 26 नवंबर 1949; लागू: 26 जनवरी 1950
मूल अधिकार: अनुच्छेद 12–35 (भाग III)
DPSP: अनुच्छेद 36–51 (भाग IV) – Non-Justiciable
मूल कर्तव्य: अनुच्छेद 51A – 11 कर्तव्य
अनु. 21: जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार ('सुनहरा' अधिकार)
अनु. 32: 'संविधान की आत्मा' – Dr. Ambedkar के अनुसार
अनु. 352: राष्ट्रीय आपातकाल; अनु. 356: राष्ट्रपति शासन
अनु. 44: समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code)
भाग III (Part III) में मूल अधिकार (अनुच्छेद 12–35):
अनुच्छेद 12: राज्य की परिभाषा अनुच्छेद 13: मूल अधिकारों के विरुद्ध कानून शून्य अनुच्छेद 14: विधि के समक्ष समानता (Equality before law) अनुच्छेद 15: धर्म, जाति, लिंग के आधार पर भेदभाव का निषेध अनुच्छेद 16: सरकारी नौकरियों में समान अवसर अनुच्छेद 17: छुआछूत का उन्मूलन ★ अनुच्छेद 18: उपाधियों का अंत (Lords, Sir आदि) अनुच्छेद 19: 6 स्वतंत्रताएं (बोलने की आजादी, घूमने की आजादी आदि) ★ अनुच्छेद 20: दोहरे दंड से संरक्षण अनुच्छेद 21: जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार ★ अनुच्छेद 21A: 6-14 वर्ष बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा ★ (86वाँ संशोधन, 2002) अनुच्छेद 22: गिरफ्तारी से संरक्षण अनुच्छेद 23: बेगार और दास प्रथा का निषेध अनुच्छेद 24: 14 वर्ष से कम बच्चों से काम करवाना वर्जित ★ अनुच्छेद 25-28: धार्मिक स्वतंत्रता अनुच्छेद 29-30: अल्पसंख्यकों के अधिकार अनुच्छेद 32: संवैधानिक उपचारों का अधिकार – Dr. Ambedkar ने इसे 'संविधान की आत्मा' कहा ★
भाग IV (Part IV) में DPSP (अनुच्छेद 36–51):
अनुच्छेद 38: सामाजिक न्याय की स्थापना अनुच्छेद 39A: समान न्याय और मुफ्त कानूनी सहायता अनुच्छेद 40: ग्राम पंचायत की स्थापना (Panchayati Raj) अनुच्छेद 44: समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) अनुच्छेद 45: 6 वर्ष तक बच्चों की देखभाल (पूर्व में 14 वर्ष तक शिक्षा) अनुच्छेद 46: SC/ST और कमजोर वर्गों का संरक्षण अनुच्छेद 48: गाय वध का निषेध अनुच्छेद 48A: पर्यावरण संरक्षण अनुच्छेद 51: अंतर्राष्ट्रीय शांति की वृद्धि
नोट: DPSP न्यायोचित नहीं हैं (Non-Justiciable) – सरकार इनके लिए बाध्य नहीं।
भाग IVA – अनुच्छेद 51A: 42वें संशोधन (1976) में जोड़े गए, 86वें संशोधन (2002) में 11वाँ कर्तव्य जोड़ा गया।
11 मूल कर्तव्य:
राष्ट्रपति: अनुच्छेद 52: राष्ट्रपति का पद अनुच्छेद 53: कार्यपालिका शक्ति अनुच्छेद 54: राष्ट्रपति का निर्वाचन अनुच्छेद 61: राष्ट्रपति पर महाभियोग अनुच्छेद 72: क्षमादान की शक्ति ★ अनुच्छेद 74: मंत्रिपरिषद की सहायता
प्रधानमंत्री: अनुच्छेद 75: प्रधानमंत्री की नियुक्ति
संसद: अनुच्छेद 79: संसद की संरचना अनुच्छेद 83: संसद की अवधि अनुच्छेद 100: संसद में मतदान अनुच्छेद 108: दोनों सदनों की संयुक्त बैठक अनुच्छेद 112: वार्षिक वित्तीय विवरण (Budget) अनुच्छेद 123: राष्ट्रपति का अध्यादेश अनुच्छेद 352: राष्ट्रीय आपातकाल ★ अनुच्छेद 356: राष्ट्रपति शासन (Article 356) ★ अनुच्छेद 360: वित्तीय आपातकाल
सर्वोच्च न्यायालय: अनुच्छेद 124: सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना अनुच्छेद 125: न्यायाधीशों का वेतन अनुच्छेद 137: समीक्षा शक्ति (Review Power) अनुच्छेद 143: राष्ट्रपति का परामर्श
रिट (Writ): अनुच्छेद 32: सर्वोच्च न्यायालय रिट जारी करे ★ अनुच्छेद 226: उच्च न्यायालय रिट जारी करे
5 प्रकार की रिट:
★ सबसे अधिक पूछे जाने वाले:
अनु. 14: समानता का अधिकार अनु. 15: भेदभाव का निषेध अनु. 17: छुआछूत का उन्मूलन अनु. 19: 6 मूल स्वतंत्रताएं अनु. 21: जीवन का अधिकार ('सुनहरा' अधिकार) अनु. 21A: शिक्षा का अधिकार अनु. 24: बाल श्रम निषेध अनु. 32: संवैधानिक उपचार (संविधान की आत्मा) अनु. 44: समान नागरिक संहिता अनु. 51A: मूल कर्तव्य (11 कर्तव्य) अनु. 72: राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति अनु. 352: राष्ट्रीय आपातकाल अनु. 356: राष्ट्रपति शासन अनु. 360: वित्तीय आपातकाल
मूल अधिकार भाग III में अनुच्छेद 12 से 35 के बीच हैं। इनमें 6 मूल अधिकार हैं: समानता, स्वतंत्रता, शोषण के विरुद्ध, धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक-शैक्षिक, संवैधानिक उपचार।
अनुच्छेद 32 नागरिकों को मूल अधिकारों के उल्लंघन पर सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार देता है। डॉ. अंबेडकर ने इसे 'संविधान की आत्मा' कहा क्योंकि बिना इसके अन्य अधिकार बेकार होंगे।
DPSP (अनु. 36–51) सरकार को नीति बनाने के दिशा-निर्देश हैं। ये Non-Justiciable हैं अर्थात् नागरिक इनके लिए अदालत नहीं जा सकते। ये कल्याणकारी राज्य की स्थापना के लिए हैं।
अनुच्छेद 21 के अनुसार किसी भी व्यक्ति को विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित किया जा सकता है। न्यायालय ने इसके तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण जैसे अनेक अधिकार भी शामिल किए हैं।
राष्ट्रीय आपातकाल अनुच्छेद 352 के तहत लगाया जाता है। राष्ट्रपति शासन अनुच्छेद 356 के तहत लगाया जाता है। वित्तीय आपातकाल अनुच्छेद 360 के तहत होता है।
मूल कर्तव्य अनुच्छेद 51A में हैं। कुल 11 मूल कर्तव्य हैं। 42वें संशोधन (1976) में 10 जोड़े गए, 86वें संशोधन (2002) में 11वाँ (बच्चों को शिक्षा दिलाना) जोड़ा गया।
छुआछूत को अनुच्छेद 17 से समाप्त किया गया है। यह मूल अधिकार है। इसके अंतर्गत Untouchability Offences Act 1955 (अब Protection of Civil Rights Act 1955) बनाया गया।
अनुच्छेद 21A 86वें संवैधानिक संशोधन 2002 द्वारा जोड़ा गया। इसके तहत 6 से 14 वर्ष के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का मूल अधिकार है। इसी के आधार पर RTE (Right to Education) Act 2009 बना।
5 रिट: 1) Habeas Corpus (बंदी प्रत्यक्षीकरण – गिरफ्तारी की जाँच), 2) Mandamus (परमादेश – काम करने का आदेश), 3) Prohibition (प्रतिषेध – निचली अदालत को रोकना), 4) Certiorari (उत्प्रेषण – निचली अदालत का आदेश रद्द), 5) Quo Warranto (अधिकार पृच्छा – पद की वैधता)।
अनुच्छेद 44 राज्य को Uniform Civil Code (समान नागरिक संहिता) बनाने का निर्देश देता है। यह DPSP है, मूल अधिकार नहीं। इसका अर्थ है सभी धर्मों के नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार में एक समान कानून।
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