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यदा यदा हि धर्मस्य — श्लोक का अर्थ हिंदी में

'यदा यदा हि धर्मस्य...' भगवद्गीता के चतुर्थ अध्याय के श्लोक 7 और 8 हैं, जिनमें भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि वे पृथ्वी पर क्यों और कब अवतार लेते हैं।

Question (Click to Flip)

'धर्मस्य ग्लानि' का क्या अर्थ है?

Answer

'ग्लानि' का अर्थ है हानि, पतन, या कमज़ोरी। 'धर्मस्य ग्लानि' = धर्म का पतन या उसकी शक्ति का कमज़ोर पड़ना। यानी जब समाज में नैतिकता, सत्य और न्याय कम हो जाएं।

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Key Facts

यह श्लोक महाभारत के कुरुक्षेत्र युद्ध से पहले अर्जुन को दिए गए उपदेश का हिस्सा है। गीता में कुल 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं — यह श्लोक अध्याय 4, श्लोक 7-8 है।

पूर्ण श्लोक (Sanskrit)

श्लोक 7: यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥

श्लोक 8: परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्। धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥

हिंदी अर्थ (Word by Word)

श्लोक 7 का अर्थ:

  • यदा यदा = जब जब भी
  • धर्मस्य = धर्म की
  • ग्लानि = हानि/कमी/पतन
  • भवति = होती है
  • भारत = हे भारत (अर्जुन)
  • अभ्युत्थानम् = वृद्धि/बढ़ोत्तरी
  • अधर्मस्य = अधर्म की
  • तदा = तब
  • आत्मानं = स्वयं को
  • सृजामि = प्रकट करता हूँ
  • अहम् = मैं (श्रीकृष्ण)

अनुवाद: "हे अर्जुन! जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं अपने आप को प्रकट करता हूँ।"

श्लोक 8 का अर्थ:

  • परित्राणाय = रक्षा के लिए
  • साधूनां = सज्जनों/भक्तों की
  • विनाशाय = नाश के लिए
  • दुष्कृताम् = दुष्टों/पापियों के
  • धर्मसंस्थापनार्थाय = धर्म की स्थापना के लिए
  • सम्भवामि = प्रकट होता हूँ
  • युगे युगे = युग-युग में (हर युग में)

अनुवाद: "सज्जनों की रक्षा के लिए, दुष्टों के विनाश के लिए, और धर्म की स्थापना के लिए मैं युग-युग में जन्म लेता हूँ।"

श्लोक का महत्व

यह श्लोक हिंदू दर्शन का सार है। यह बताता है:

  1. ईश्वर निष्क्रिय नहीं: जब भी पृथ्वी पर असंतुलन बढ़ता है, परमात्मा हस्तक्षेप करते हैं।
  2. अवतार का उद्देश्य: राम, कृष्ण, बुद्ध — सभी अवतारों का लक्ष्य यही तीन कार्य हैं: साधुओं की रक्षा, दुष्टों का नाश, धर्म की स्थापना।
  3. चक्रीय दृष्टिकोण: हिंदू दर्शन में इतिहास चक्रीय (cyclical) है — धर्म और अधर्म के उतार-चढ़ाव से भरा।

Questions and Answers

'धर्मस्य ग्लानि' का क्या अर्थ है?+

'ग्लानि' का अर्थ है हानि, पतन, या कमज़ोरी। 'धर्मस्य ग्लानि' = धर्म का पतन या उसकी शक्ति का कमज़ोर पड़ना। यानी जब समाज में नैतिकता, सत्य और न्याय कम हो जाएं।

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