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सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement)

सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है। इसकी शुरुआत 1930 में महात्मा गांधी ने ऐतिहासिक दांडी मार्च के साथ की थी। यह कक्षा 10 के इतिहास (भारत में राष्ट्रवाद) का मुख्य विषय है।

Question (Click to Flip)

सविनय अवज्ञा और असहयोग आंदोलन में क्या अंतर था?

Answer

असहयोग आंदोलन (1920) का लक्ष्य अंग्रेजों का सहयोग न करना था (स्कूल, दफ्तर छोड़ना)। लेकिन सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) एक कदम आगे था — इसमें ब्रिटिश सरकार के कानूनों (जैसे नमक कानून, टैक्स कानून) को जानबूझकर तोड़ा गया।

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Key Facts

इस आंदोलन में पहली बार भारतीय महिलाओं ने बहुत बड़ी संख्या में घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर आज़ादी की लड़ाई में भाग लिया था।

आंदोलन का अर्थ

'सविनय' (विनम्रता के साथ) 'अवज्ञा' (आज्ञा न मानना)। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य था: ब्रिटिश सरकार के अन्यायपूर्ण कानूनों को शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीके से तोड़ना और सरकार का काम ठप करना। (असहयोग आंदोलन में केवल सहयोग न करने की बात थी, इसमें कानून तोड़ने की बात थी)।

आंदोलन की शुरुआत (दांडी मार्च)

महात्मा गांधी ने आंदोलन की शुरुआत अंग्रेजों के 'नमक कानून' (Salt Law) को तोड़कर की। अंग्रेजों ने नमक जैसी बुनियादी चीज़ पर भारी टैक्स लगा रखा था।

  • 12 मार्च 1930 को गांधीजी ने साबरमती आश्रम से अपने 78 अनुयायियों के साथ 240 मील की पदयात्रा शुरू की।
  • 6 अप्रैल 1930 को वे गुजरात के दांडी तट पर पहुँचे, समुद्र का पानी उबालकर नमक बनाया और कानून तोड़ दिया। यहीं से सविनय अवज्ञा आंदोलन पूरे देश में फैल गया।

आंदोलन के प्रमुख कार्यक्रम

  • देश भर में लोगों ने नमक कानून तोड़ा।
  • किसानों ने लगान (टैक्स) और चौकीदारी कर चुकाने से मना कर दिया।
  • विदेशी कपड़ों की होली जलाई गई और शराब की दुकानों पर पिकेटिंग (धरना) की गई।
  • वनवासियों (Tribals) ने जंगल के कानूनों का उल्लंघन किया।

गांधी-इरविन समझौता (1931)

आंदोलन की व्यापकता को देखकर ब्रिटिश सरकार घबरा गई। मार्च 1931 में वायसराय लॉर्ड इरविन और गांधीजी के बीच एक समझौता हुआ। गांधीजी ने आंदोलन को अस्थायी रूप से रोक दिया और 'द्वितीय गोलमेज सम्मेलन' (Second Round Table Conference) में भाग लेने लंदन गए।

Questions and Answers

सविनय अवज्ञा और असहयोग आंदोलन में क्या अंतर था?+

असहयोग आंदोलन (1920) का लक्ष्य अंग्रेजों का सहयोग न करना था (स्कूल, दफ्तर छोड़ना)। लेकिन सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) एक कदम आगे था — इसमें ब्रिटिश सरकार के कानूनों (जैसे नमक कानून, टैक्स कानून) को जानबूझकर तोड़ा गया।

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