हिंदी भाषा का जन्म संस्कृत से हुआ है। इसलिए हिंदी में इस्तेमाल होने वाले शब्दों को उनकी उत्पत्ति के आधार पर दो मुख्य भागों में बांटा गया है: तत्सम (Tatsam) और तद्भव (Tadbhav)।
तत्सम (Tatsam): संस्कृत के शुद्ध और मूल शब्द (जैसे: अश्रु)।
तद्भव (Tadbhav): संस्कृत से बदलकर बने हुए आसान हिंदी शब्द (जैसे: आँसू)।
पहचानने की ट्रिक: जिन शब्दों में क्ष, त्र, ज्ञ, श्र या आधे अक्षर का प्रयोग होता है, वे ज़्यादातर 'तत्सम' शब्द होते हैं।
'तत्सम' दो शब्दों से मिलकर बना है (तत् + सम) जिसका अर्थ है 'उसके समान'।
'तद्भव' का अर्थ है 'उससे उत्पन्न हुआ'।
| तत्सम (संस्कृत/शुद्ध) | तद्भव (हिंदी/बदला हुआ) |
|---|---|
| चंद्र (Chandra) | चाँद (Chand) |
| आम्र (Aamra) | आम (Aam) |
| हस्त (Hast) | हाथ (Hath) |
| सत्य (Satya) | सच (Sach) |
| रात्रि (Ratri) | रात (Raat) |
| निद्रा (Nidra) | नींद (Neend) |
संस्कृत के जो शब्द हिंदी में बिना रूप बदले ज्यों के त्यों प्रयोग होते हैं, उन्हें तत्सम शब्द कहते हैं (जैसे- अग्नि)। और जिनका रूप बोलचाल के कारण बदल गया है, उन्हें तद्भव शब्द कहते हैं (जैसे- आग)।
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