Study Guides/Hindi/Girish Ka Sandhi Viched — गिरीश का संधि विच्छेद
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गिरीश का संधि विच्छेद

गिरीश का संधि विच्छेद है: गिरि + ईश। यहाँ 'गिरि' के अंत में 'इ' और 'ईश' के प्रारंभ में 'ई' का मेल होता है। इ + ई = ई (दीर्घ संधि)। यह स्वर संधि का उदाहरण है।

Question (Click to Flip)

गिरीश का संधि विच्छेद क्या है?

Answer

गिरीश = गिरि + ईश। इ + ई = ई (दीर्घ स्वर संधि)।

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Key Facts

गिरीश = गिरि + ईश (संधि विच्छेद)।

संधि: इ + ई = ई (दीर्घ संधि)।

संधि का प्रकार: स्वर संधि, दीर्घ संधि।

गिरीश का अर्थ: पर्वतों का स्वामी (शिव)।

इसी प्रकार: हरि + ईश = हरीश; मुनि + ईश = मुनीश।

गिरीश का संधि विच्छेद

समस्त पद: गिरीश संधि विच्छेद: गिरि + ईश

संधि नियम: इ + ई = ई (दीर्घ संधि) गिरि (इ) + ईश (ई) = गिरीश

संधि का प्रकार: स्वर संधि → दीर्घ संधि

अर्थ: गिरि = पर्वत ईश = स्वामी/ईश्वर गिरीश = पर्वतों का स्वामी = शिव

दीर्घ संधि का नियम: जब दो समान स्वर (ह्रस्व + ह्रस्व, दीर्घ + दीर्घ, या ह्रस्व + दीर्घ) पास आते हैं तो दीर्घ स्वर बनता है। अ/आ + अ/आ = आ इ/ई + इ/ई = ई उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ

दीर्घ संधि के और उदाहरण

इ + इ = ई: कवि + इंद्र = कवींद्र गिरि + इंद्र = गिरींद्र

इ + ई = ई: गिरि + ईश = गिरीश ✓ मुनि + ईश = मुनीश हरि + ईश = हरीश

ई + इ = ई: नारी + इंद्र = नारींद्र

ई + ई = ई: नदी + ईश = नदीश मही + ईश = महीश

अ + अ = आ: राम + अवतार = रामावतार देव + आलय = देवालय

उ + उ = ऊ: भानु + उदय = भानूदय सु + उक्ति = सूक्ति

Questions and Answers

गिरीश का संधि विच्छेद क्या है?+

गिरीश = गिरि + ईश। इ + ई = ई (दीर्घ स्वर संधि)।

गिरीश में कौन सी संधि है?+

दीर्घ संधि (स्वर संधि)। गिरि का 'इ' और ईश का 'ई' मिलकर 'ई' बनाते हैं।

दीर्घ संधि का नियम क्या है?+

जब समान स्वर (इ+इ, इ+ई, ई+ई आदि) पास आते हैं तो दीर्घ स्वर बनता है। इ/ई + इ/ई = ई।

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