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मनुस्मृति क्या है? (What is Manusmriti?)

भारतीय इतिहास और धर्मशास्त्र में, 'मनुस्मृति' (Manusmriti) जिसे 'मानव धर्मशास्त्र' भी कहा जाता है, संभवतः सबसे विशाल, सबसे प्रसिद्ध, और आधुनिक समय में सबसे भारी 'विवादित' प्राचीन ग्रंथ है। यह प्राचीन भारत का एक भारी कानून या संविधान (Legal Code) हुआ करता था।

Question (Click to Flip)

क्या आज भी भारत में मनुस्मृति का कानून चलता है?

Answer

बिल्कुल नहीं! आधुनिक भारत केवल और केवल 'भारत के संविधान' (Constitution of India) से चलता है। भारतीय संविधान ने छुआछूत (Untouchability) और जातिगत भारी भेदभाव को पूरी तरह से एक भयंकर गैर-कानूनी अपराध घोषित कर दिया है।

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Key Facts

जब अंग्रेजों ने भारी भारत पर कब्ज़ा किया, तो उन्हें हिंदुओं पर भारी राज करने के लिए उनके पुराने कानून समझने थे। 1794 में, सर विलियम जोन्स ने अंग्रेजों के लिए सबसे पहली बार मनुस्मृति का भारी अंग्रेज़ी अनुवाद किया था।

1. मनुस्मृति असल में क्या है?

  • 'मनु' प्राचीन हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार संसार के पहले भारी इंसान और पहले राजा माने जाते हैं।
  • मनुस्मृति एक विशाल 'कानूनी और सामाजिक नियम-पुस्तक' (Rulebook) है, जिसे संस्कृत के भारी श्लोकों में लिखा गया है।
  • इसमें एक व्यक्ति के जन्म से लेकर भारी मृत्यु तक के हर छोटे-बड़े नियम लिखे गए हैं: जैसे मनुष्य को क्या खाना चाहिए, विवाह कैसे करना चाहिए, महिलाओं का भारी कर्तव्य क्या है, राजा को शासन कैसे करना चाहिए, और भारी अपराधों के लिए अपराधियों को क्या भयानक सजा देनी चाहिए।

2. यह इतना भारी विवादित (Controversial) क्यों है?

आधुनिक लोकतांत्रिक भारत में इस भारी ग्रंथ का प्रचंड रूप से विरोध किया जाता है, जिसके दो मुख्य विशाल कारण हैं:

  • कठोर जाति व्यवस्था (Caste System): मनुस्मृति ने समाज को चार भारी वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र) में बहुत ही क्रूरता से बांट दिया था। इसमें 'शूद्रों' (निचली जातियों) के लिए शिक्षा प्राप्त करना या धन रखना भारी अपराध घोषित किया गया था, और उनके लिए भयानक रूप से क्रूर और भारी अमानवीय सजाओं का प्रावधान था।
  • महिलाओं की भारी स्थिति: इसमें महिलाओं की स्वतंत्रता को पूरी तरह खत्म कर दिया गया था। श्लोकों में साफ लिखा है कि एक महिला को बचपन में अपने पिता, जवानी में अपने पति, और बुढ़ापे में अपने भारी बेटे के सख्त नियंत्रण में रहना चाहिए। महिलाओं को आज़ादी का कोई अधिकार नहीं है।

3. डॉ. बी.आर. अंबेडकर का भारी विरोध

भारत के भारी संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने मनुस्मृति को 'दलितों और महिलाओं के भारी उत्पीड़न और गुलामी' का सबसे बड़ा हथियार माना। अपने भारी गुस्से और विरोध को दर्ज करने के लिए, उन्होंने 25 दिसंबर 1927 को भारी जनसभा के सामने मनुस्मृति की विशाल किताब को सार्वजनिक रूप से आग में जला दिया था (Manusmriti Dahan Din)।

Questions and Answers

क्या आज भी भारत में मनुस्मृति का कानून चलता है?+

बिल्कुल नहीं! आधुनिक भारत केवल और केवल **'भारत के संविधान' (Constitution of India)** से चलता है। भारतीय संविधान ने छुआछूत (Untouchability) और जातिगत भारी भेदभाव को पूरी तरह से एक भयंकर गैर-कानूनी अपराध घोषित कर दिया है।

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